रामसरन के परिवार से ही रक्त संबंध रखता है रामकेवल, कोर्ट ने किया रिहा

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 खोराबार के छितौना गांव निवासी रामकेवल का रामसरन के परिवार से ही रक्त संबंध पाया गया है। डीएनए जांच में इसकी पुष्टि होने पर उसकी गिरफ्तारी और जेल में निरुद्ध करना गैरकानूनी पाते हुए कोर्ट ने रामकेवल को जेल से तुरंत रिहा करा दिया। इसी के साथ करीब तीन महीने से अवैध तरीके से जेल में बंद रामकेवल अब बाहर आ गया।

रामकेवल का नाम छितौना गांव की एक जमीन बेचने के बाद सामने आया था। असली रामकेवल (जिसके नाम जमीन है) को मृत बताकर उनके भतीजे रामसरन ने खरीदार, उसकी पत्नी और जमीन बेचने वाले रामकेवल पर फर्जीवाड़ा सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया था। भतीजे का दावा है कि उसके चाचा रामकेवल पुत्र विपत की मौत हो चुकी है।

उनकी जगह किसी दूसरे ने खड़े होकर अपने आप को रामकवल बताकर जमीन का सौदा कर दिया। एफआइआर की विवेचना कर रहे दारोगा ने विवेचना के बाद आधार कार्ड में पिता नाम दूसरा होने के आधार पर चार्जशीट लगा दी थी। मामला ट्रायल तक पहुंच गया पर रामकेवल कोर्ट में हाजिर नहीं हुए जिसके बाद उनके ऊपर एनबीडब्लू जारी हो गया।

20 सितंबर को गगहा पुलिस ने वारंटी के तौर पर रामकेवल को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। रामकेवल के जेल जाने के बाद उनकी बहन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, दावा था कि रामकिशुन के पुत्र रामकेवल पर एफआईआर दर्ज की गई है जबकि पुलिस ने गलत पहचान के कारण विपत के पुत्र रामकेवल को अवैध रूप से जेल में निरूद्ध किया।

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर तथा न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ ने रामकेवल की बहन की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई शुरू की। इसी क्रम में कोर्ट ने डीएनए जांच का आदेश दिया था। शिकायतकर्ता रामसरन और आरोपित रामकेवल का डीएनए जांच कराने के बाद उनका रक्त संबंध एक ही मिला है जिसके आधार पर रामकेवल के फर्जी होने का आरोप गलत पाया गया।

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