रोज कमाई 2000, खर्च 3000; घाटे में चल रही भागलपुर की पिंक बस सेवा नहीं होंगी बंद

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 महिलाओं की सुरक्षित और सहज यात्रा के उद्देश्य से चलाई जा रही पिंक बस सेवा आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही है। यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ आय पहले की तुलना में दोगुनी होकर करीब 2000 रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गई है, लेकिन 3000 रुपये का दैनिक सीएनजी खर्च सेवा को लगातार घाटे में ढकेल रहा है।

इसके बावजूद निगम इस सुविधा को बंद करने के मूड में नहीं है और संचालन को मजबूत बनाने की दिशा में प्रयास जारी है।

महिला कर्मियों की कमी, जीविका दीदियों से बढ़ी उम्मीदें

सेवा की सबसे बड़ी दिक्कत महिला ड्राइवर और कंडक्टर की उपलब्धता है। आवश्यकता 15 की है, जबकि कार्यरत केवल 10 ही हैं। कई संवाहक कुछ ही दिनों में नौकरी छोड़ देती हैं, जिससे संचालन प्रभावित होता है।

इस समस्या के समाधान के लिए मुख्यालय ने जीविका दीदियों को कंडक्टर और ड्राइवर के रूप में जोड़ने की पहल की है। गुरुवार को आधा दर्जन जीविका दीदियां निगम कार्यालय पहुंचीं, जहां क्षेत्रीय प्रबंधक पवन शांडिल्य ने उन्हें काउंसलिंग कर ई-टिकटिंग मशीन का प्रशिक्षण दिया।

वहीं, पिंक बसों का ठहराव रेलवे स्टेशन पर सुनिश्चित कराने को लेकर डीआरएम को पत्र भेजा गया है, ताकि महिला यात्रियों को और सुरक्षित परिवहन सुविधा मिल सके।

आय बढ़ने के बावजूद रोजाना नुकसान

शुरुआत में जहां पिंक बसों की आमदनी 800–1200 रुपये के बीच थी, वहीं अब यह बढ़कर 2000 रुपये तक पहुंच गई है। इसके बावजूद 3000 रुपये तक का सीएनजी खर्च आय पर भारी पड़ रहा है।

भागलपुर में आठ और मुंगेर में दो पिंक बसें 4 से 6 ट्रिप प्रतिदिन संचालित हो रही हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक नुकसान के बावजूद महिलाओं की सुरक्षा प्राथमिकता में है, इसलिए सेवा जारी रहेगी।

परिवहन कर्मियों की उपस्थिति अब बायोमेट्रिक से

भागलपुर परिवहन निगम के क्षेत्रीय कार्यालय सहित सभी डिपो में अब काम करने वाले कर्मियों का बायोमैट्रिक अटेंडेंस लगेगा। मुख्यालय से मिले निर्देश के बाद तैयारी शुरू कर दी गई है।

क्षेत्रीय प्रबंधक पवन शांडिल्य ने बताया कि छह मशीन भागलपुर परिवहन प्रमंडल के आने वाले सभी डिपो में लगाई जाएगी। जिसके माध्यम से अब कर्मी अपना अटेंडेंस बनाएंगे। एजेंसी के माध्यम से मशीनें लगाई जाएंगी। मशीन में फेस रिकॉग्निशन के साथ-साथ थंब इंप्रेशन भी देना अनिवार्य होगा।

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