जम्मू संभाग में 12510 कनाल सरकारी जमीन पर कब्जा, एक हजार से अधिक अतिक्रमणकारियों ने दबा रखी है वन भूमि

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 लाख दावों के बाद भी वन विभाग अपनी कब्जाई हुई भूमि को मुक्त नहीं करवा पाया है। अभी भी जम्मू संभाग में बड़े पैमाने पर वन भूमि अतिक्रमणकारियों के कब्जे में हैं। हालांकि वन विभाग ने जम्मू संभाग में वन भूमि पर अतिक्रण के चार से अधिक मामले दर्ज किए हैं लेकिन बावजूद इसके अभी भी वन विभाग की 12510 कनाल भूमि को अतिक्रमणकारियों ने दबाकर रखा है।

जम्मू फारेस्ट डिवीजन से मिली जानकारी के अनुसार जम्मू के सुंजवां, बठिंडी, चौआदी, डुंगियां, चाटा, रैका, पालपड़, बजालता, संधड़ी आदि क्षेत्रों में पड़े पैमाने पर वन भूमि अतिक्रमणकारियों ने दबा रखी है। इन इलाकों में वन भूमि पर करीब 996 अतिक्रणकारियों ने पक्के ढांचे, कच्चे निर्माण कर रखे हैं जबकि कुछ भूमि पर खेती भी की जा रही है।

कुछ इलाकों में भूमि समतल कर दिया गया है और राजस्व विभाग से मिलीभगत कर वन भूमि पर कब्जा दिखाया है। जम्मू फारेस्ट डिवीजन के अनुसार संजवां, बठिंडी और चौआदी इलाके इस अतिक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित दिखाई देते हैं।

वहां पर वन भूमि पर पक्के मकान, दीवारें, प्लिंथ, टिन शेड और कच्चे ढांचे वन क्षेत्र में कर दिए गए हैं। कुछ स्थानों पर खेती के लिए बड़े भूभाग को समतल कर उपयोग में लाया गया है, जबकि कई इलाकों में अतिक्रमणकारियों ने फेंसिंग लगाकर भूमि की बाउंड्री कर दी है।

अवैध राजस्व प्रविष्टियां भी सामने आईं

वन भूमि पर कब्जे को लेकर वन विभाग ने एक विस्तृत रिपोर्ट भी जारी की है जिसमें बताया गया कि कई मामलों में अवैध रेवेन्यू एंट्री दर्ज है। इसका अर्थ है कि राजस्व रिकार्ड में गलत या बिना अनुमति के प्रविष्टियों के आधार पर निर्माण या कब्जा किया गया। यह तथ्य न केवल वन भूमि पर अतिक्रमण का मुद्दा उठाता है बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भी गंभीरता से जांच की आवश्यकता भी उजागर कर रहे हैं।

वन विभाग का कहना है कि वन भूमि पर पक्के ढांचों में घर, कमरे, दीवारें आती हैं जबकि कच्चे ढांचों में कुल्हा, झोंपड़ी, शेड आदि शामिल हैं। टीन शेड को वन विभाग ने अस्थायी निर्माण बताया है।

एक ही परिवार ने कर रखा है 10 से 70 कनाल भूमि पर कब्जा

विभाग का कहना है कि वन भूमि को लेकर तैयार रिपोर्ट में सामने आया है कि एक ही व्यक्ति या परिवार की ओर से 10 से 70 कनाल तक की भूमि पर कब्जे में ली गई है जबकि कुछ अतिक्रमणकारियों के कब्जे में चार सौ से लेकर आठ सौ कनाल तक भी भूमि कब्जे में है।

वहीं वन भूमि पर कब्जे को लेकर वन मंत्री जावेद राणा का कहना है कि वन भूमि का रिकार्ड तैयार किया गया तैयार किया गया है और इस रिकार्ड के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। मंत्री का कहना है कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण या कब्जा अवैध है।विभाग की ओर से अतिक्रमणकारियों की सूची जारी की गई है। इस मामले में कानून के तहत आगे की कार्रवाई होगी।

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