गुरुग्राम में रिजवुड एस्टेट बनी जीरो-वेस्ट सोसायटी, 10 साल की लगातार पहल अब बनी मिसाल

2.2kViews
1833 Shares

 शहर की तेजी से बढ़ती कचरा समस्या के बीच रिजवुड एस्टेट आरडब्ल्यूए (डीएलएफ फेज-4) ने वह कर दिखाया, जिसे अधिकतर सोसायटी लक्ष्य तो बनाती हैं पर पूरा नहीं कर पातीं। लगभग 10 साल पहले शुरू हुई एक छोटी सी पहल आज एक पूरी सोसायटी को जीरो-वेस्ट कालोनी में बदल चुकी है। रिजवुड एस्टेट सोसायटी दूसरी सोसायटी के लिए एक मिसाल बन गई है।

रिजवुड एस्टेट में 12 ब्लाक, 924 फ्लैट और करीब 3500 निवासी रहते हैं। प्रतिदिन सोसायटी से लगभग 500 किलोग्राम कचरा निकलता है। लेकिन इस कचरे को लैंडफिल तक पहुंचने से रोकने का सफर बेहद दिलचस्प है। सोसायटी में कचरे के सेग्रीगेशन की असल शुरुआत लगभग पांच साल पहले एक महिला निवासी ने की थी। उन्होंने घर-घर जाकर गीले और सूखे कचरे को अलग करने के फायदों को समझाया। लोगों को नमूना बिन दिए।

शुरुआत में खुद ही निगरानी भी की। यह काम आसान नहीं था। शुरुआती दौर में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कई परिवारों को दो बिन रखने में परेशानी लगती थी। कुछ लोग इसे अतिरिक्त मेहनत मानते थे। शुरुआती महीनों में मिक्स कचरा आना आम बात थी। मगर धीरे-धीरे उनके प्रयासों से कारवां बढ़ता गया। आरडब्ल्यूए ने कदम आगे बढ़ाया। जागरूकता अभियान चलाया। बच्चों को शामिल किया गया। पोस्टर प्रतियोगिताएं हुईं। सोसायटी के अलग-अलग ब्लाक में नियम तय किए गए और निगरानी शुरू हुई।

कैसे डाली गई घर से ही सेग्रीगेशन की आदत

बकौल रिजवुड आरडब्ल्यूए बदलाव तभी शुरू हुआ जब निवासियों को यह समझाया गया कि कचरा अलग करना सिर्फ सफाई नहीं बल्कि पर्यावरण बचाने का कदम है। शहर घर को गीला-सूखा अलग करने के लिए दो बिन उपलब्ध कराए गए। यदि घर से कचरा अलग निकलेगा। तभी आगे प्रोसेस होगा। यह संदेश मजबूती से दिया गया। आज स्थिति यह है कि प्रतिदिन निकलने वाला 500 किलोग्राम कचरे में 350 किलोग्राम गीला कचरा अलग आता है। लगभग 150 किलोग्राम सूखा कचरा प्रतिदिन पूरी तरह से सेग्रीगेट किया जाता है।

अपना कम्पोस्ट प्लांट, गीले कचरे का पूरा उपयोग सोसायटी में ही सोसायटी ने कुछ साल पहले अपना कम्पोस्ट प्लांट लगाया। इसमें रोजाना आने वाला 350 किलोग्राम गीला कचरा डाला जाता है।। कुछ ही हफ्तों में उच्च गुणवत्ता की खाद तैयार हो जाती है।

इस खाद का उपयोग सोसायटी के पार्कों और ग्रीन एरिया में किया जा रहा है। अतिरिक्त खाद आसपास की अन्य सोसायटी और आरडब्ल्यूए को भी दी जाती है। इससे फायदे यह है कि लैंडफिल तक जाने वाले कचरे में बड़ी कमी आई। बागवानी और पौधों की मिट्टी सुधारने में कम खर्च पर बेहतर परिणाम आ रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *