झारखंड के 35 लाख घरों तक पहुंचा नल से जल, वर्षा जल संचयन में 20% की बढ़ोतरी; फिर भी राष्ट्रीय औसत से पीछे

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झारखंड में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की दिशा में सरकार को बड़ी उपलब्धि मिली है। राज्य के करीब 35 लाख घरों तक नल के जरिए जल पहुंचाया जा चुका है। इसके साथ ही वर्षा जल संचयन के क्षेत्र में भी सुधार दर्ज किया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में वर्षा जल संचयन में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद झारखंड अभी राष्ट्रीय औसत से पीछे बना हुआ है।

जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य में जल जीवन मिशन के तहत लगातार काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से नियमित और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। 35 लाख घरों तक नल से पानी पहुंचना इसी अभियान की प्रगति को दर्शाता है।

दूसरी ओर, जल संकट से निपटने और भूजल स्तर को बेहतर बनाए रखने के लिए वर्षा जल संचयन पर भी जोर दिया जा रहा है। इसमें 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। वर्षा के पानी को संरक्षित करने से भविष्य में पेयजल और सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, राष्ट्रीय औसत की तुलना में झारखंड की स्थिति अभी भी पीछे है। ऐसे में राज्य के सामने जलापूर्ति योजनाओं को और तेज करने, अधूरे कार्यों को पूरा करने और वर्षा जल संचयन के उपायों को व्यापक स्तर पर लागू करने की चुनौती बनी हुई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल घरों तक नल का कनेक्शन पहुंचाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित जलापूर्ति और पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

अब देखना होगा कि झारखंड सरकार इन योजनाओं को किस गति से आगे बढ़ाती है और राष्ट्रीय औसत के अंतर को कम करने के लिए क्या कदम उठाती है।

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