रोहतास की 150 से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी, सास भी कहती हैं- मेरी बहू घर की लक्ष्मी है
बिहार के रोहतास जिले से महिलाओं की आत्मनिर्भरता और सफलता की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। यहां 150 से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। कभी घर की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं आज खुद कमाई कर रही हैं और परिवार की आर्थिक मजबूती में अहम योगदान दे रही हैं।
इस बदलाव की खास बात यह है कि महिलाओं को उनके परिवार का भी सहयोग मिल रहा है। घर की सास भी अपनी बहुओं की सफलता पर गर्व करते हुए कहती हैं कि मेरी बहू घर की लक्ष्मी है। यह सोच समाज में महिलाओं की बदलती भूमिका और पारिवारिक सहयोग की सकारात्मक तस्वीर पेश करती है।
स्वयं सहायता समूहों से मिली नई पहचान
रोहतास जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में स्वयं सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। इन समूहों के माध्यम से महिलाएं एकजुट होकर आर्थिक गतिविधियों से जुड़ रही हैं। उन्हें बचत, ऋण और स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
महिलाएं अपनी रुचि और स्थानीय जरूरतों के अनुसार अलग-अलग छोटे व्यवसायों से जुड़कर आमदनी बढ़ा रही हैं। इससे उन्हें अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की मजबूरी भी कम हो रही है।
कमाई के साथ बढ़ा आत्मविश्वास
लखपति दीदी बनने का सफर सिर्फ आमदनी बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इससे महिलाओं के आत्मविश्वास और सामाजिक पहचान में भी बदलाव आया है। अब वे परिवार के आर्थिक फैसलों में भागीदारी निभा रही हैं और अपने बच्चों की शिक्षा तथा बेहतर भविष्य के लिए भी योगदान दे रही हैं।
सास-बहू के रिश्ते में भी दिखा बदलाव
इस सफलता की कहानी में परिवार का सहयोग भी खास महत्व रखता है। जब सास अपनी बहू की मेहनत और उपलब्धि पर गर्व करती हैं, तो यह सामाजिक बदलाव का एक सकारात्मक उदाहरण बन जाता है। महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए परिवार का समर्थन मिलना उनकी सफलता को और मजबूत बनाता है।
रोहतास की 150 से अधिक महिलाओं की यह उपलब्धि बताती है कि सही अवसर, मेहनत और सहयोग मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं। अब ये महिलाएं केवल अपने परिवार की जिम्मेदारी नहीं संभाल रहीं, बल्कि दूसरे लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

