दीवाली पर मिठाइयां खाने से क्यों होता है गिल्ट? डॉक्टर ने बताए ‘फेस्टिव फूड एंग्जाइटी’ से बचने के आसान तरीके

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दीवाली का त्योहार हो और घर में मिठाइयां न हों, ऐसा भला कैसे हो सकता है? लड्डू, काजू कतली, गुलाब जामुन और तरह-तरह के पकवान त्योहार की खुशियों को दोगुना कर देते हैं। लेकिन कई लोग मिठाई खाने के बाद गिल्ट महसूस करने लगते हैं। उन्हें लगता है कि त्योहार के दौरान खानपान में थोड़ी छूट लेने से उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। इसी चिंता को ‘फेस्टिव फूड एंग्जाइटी’ कहा जाता है।

डॉक्टरों के मुताबिक, त्योहारों के दौरान खाने को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंता करना मानसिक तनाव बढ़ा सकता है। कई बार लोग पसंदीदा मिठाई खाने के बाद खुद को दोषी मानने लगते हैं या खानपान को लेकर अनावश्यक दबाव महसूस करते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह है कि त्योहार का आनंद लेते समय खाने को लेकर संतुलित और सहज नजरिया अपनाना चाहिए। मिठाइयों का स्वाद लेना गलत नहीं है। जरूरी यह है कि अपने शरीर की भूख और संतुष्टि के संकेतों को समझें और आराम से भोजन करें।

फेस्टिव फूड एंग्जाइटी से बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखा जा सकता है।

पहला, किसी खास खाने को लेकर खुद पर अनावश्यक पाबंदियां न लगाएं। दूसरा, मिठाई खाने के बाद अपराधबोध महसूस करने की जरूरत नहीं है। तीसरा, त्योहारों में नियमित भोजन और पर्याप्त पानी का ध्यान रखें। चौथा, खाने की तुलना दूसरों से न करें और सोशल मीडिया पर दिखने वाले खानपान के आदर्शों को खुद पर लागू न करें।

इसके साथ ही नींद, आराम और रोजमर्रा की सामान्य दिनचर्या बनाए रखना भी फायदेमंद हो सकता है।

याद रखें, दीवाली खुशियों और अपनों के साथ समय बिताने का त्योहार है, न कि खाने को लेकर तनाव लेने का। इसलिए मिठाइयों का आनंद लें, अपने शरीर की जरूरतों का ध्यान रखें और खानपान को लेकर खुद को दोषी महसूस करने से बचें।

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