रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोर्ट ने ED को दिया 3 हफ्ते का समय, 10 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। गुरुग्राम के शिकोहपुर में वर्ष 2008 में हुए जमीन सौदे से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को दस्तावेज दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।

इस मामले में राबर्ट वाड्रा समेत 11 आरोपित हैं। राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश शिवाली बंसल की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 दिसंबर 2026 की तारीख तय की है।

इस मामले में अदालत ने 15 अप्रैल 2026 को राबर्ट वाड्रा को आरोपित के रूप में समन जारी करने का आदेश दिया था। वाड्रा ने इस आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने समन पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया था।

राबर्ट वार्डा समेत इनपर मनी लांड्रिंग के आरोप
वाड्रा के अलावा सत्यनंद याजी, केवल सिंह विर्क, स्काईलाइट हास्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड, स्काईलाइट रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड, स्काईलाइट रियल अर्थ एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड, ब्लू ब्रीज ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड, आर्टेक्स, नार्थ इंडिया आइटी पार्क्स प्राइवेट लिमिटेड, लम्बोदर आर्ट एंटरप्राइजेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और एसजीवाई प्रापर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को भी समन जारी किया गया है।

अदालत ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा तीन और चार के तहत ईडी की ओर से दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान लिया था। सुनवाई के दौरान वाड्रा की ओर से दलील दी गई कि उनके खिलाफ मनी लांड्रिंग का कोई मामला नहीं बनता है। उनके अधिवक्ता ने आरोपपत्र पर अदालत द्वारा संज्ञान लिए जाने को भी चुनौती दी।

ईडी के अनुसार, वर्ष 2008 में स्काईलाइट हास्पिटैलिटी ने गुरुग्राम के शिकोहपुर में 3.5 एकड़ जमीन ओमकारेश्वर प्रापर्टीज से 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी। उस समय राबर्ट वाड्रा इस कंपनी के निदेशक थे। आरोप है कि जमीन का स्वामित्व महज 24 घंटे के भीतर कंपनी के नाम स्थानांतरित हो गया।

इसके बाद वर्ष 2012 में कंपनी ने यही जमीन डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दी। इस सौदे से कंपनी को बड़ा लाभ हुआ। मामले में वर्ष 2018 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

 

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