फर्जी एनकाउंटर और केस में फंसाने का आरोप खारिज: पूर्व विधायक अजीत कुमार व तत्कालीन SP को मिली कोर्ट से राहत

1031 Shares

 जनपद न्यायाधीश की अदालत ने गुन्नौर के पूर्व विधायक अजीत कुमार यादव, तत्कालीन एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई, सीओ दीपक तिवारी समेत 15 लोगों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने दुष्कर्म के आरोपित जुनावई के गांव नगला अजमेरी निवासी भद्रपाल शर्मा की रिवीजन याचिका को खारिज करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के फैसले को सही ठहराया है।

जुनावई क्षेत्र के गांव नगला अजमेरी निवासी भद्रपाल शर्मा ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने गुन्नौर के पूर्व विधायक अजीत कुमार, उनकी पत्नी निशेष यादव और उनकी मां व पूर्व विधायक पुष्पा देवी को पक्षकार बनाया था।वादी का आरोप था कि 25 जून 2025 को वह गुन्नौर एसडीएम कोर्ट में अपने राजस्व मुकदमे की पैरवी के लिए गए थे। आरोप है कि वहां पूर्व विधायक अजीत कुमार अपने परिवार के साथ आए।

उन्होंने धमकाया कि यदि उसने अपना मुकदमा वापस नहीं लिया, तो नौकरानी से कहकर एससी-एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज करवा देंगे। साथ ही, एसपी और सीओ से कहकर फर्जी एनकाउंटर कराने या दुष्कर्म के मामले में झूठा फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी थी।

वादी का दावा था कि इसी घटना के बाद उसके खिलाफ दुष्कर्म का झूठा मुकदमा दर्ज करवाकर उसे जेल भेजा गया। इस मुकदमे को रद कराने के लिए वादी ने उच्च न्यायालय की शरण ली।

साथ ही न्यायालय में धारा 156/3 में पूर्व विधायक अजीत कुमार पर तत्कालीन एसपी कृष्णकुमार विश्नोई समेत 15 लोगों से हमसाज होकर झूठा मुकदमा दर्ज कराने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई के लिए प्रार्थना पत्र दिया, जिसे न्यायालय ने निरस्त कर दिया।

इसके बाद वादी ने जनपद न्यायाधीश की अदालत में रिवीजन याचिका दायर की। शनिवार को सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने पूर्व विधायक, एसपी समेत सभी 15 पक्षकारों की तरफ से पैरवी करते हुए दलील दी कि वादी दबाव बनाने के लिए निराधार और मनगढ़ंत आरोप लगा रहा है।

जांच में स्पष्ट हुआ कि उसने पीड़िता को कमरे में बुलाकर दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था और घटना के समय उसकी लोकेशन भी घटनास्थल पर ही पाई गई थी।

इसके अलावा, पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए आरोप भी पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने वादी भद्रपाल शर्मा की रिवीजन याचिका को रद कर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *