सर्वार्थ सिद्धि योग में आज मनेगी शरद पूर्णिमा:आसमान से अमृत बरसने की मान्यता, धरती पर पधारेंगी मां लक्ष्मी

1735 Shares

आज शरद पूर्णिमा सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाया जाएगा। प्रदोष काल और निशीथ काल में पूर्णिमा तिथि आज है। वहीं, स्नान दान तथा व्रत की पूर्णिमा उदयातिथि में कल सोमवार को मनायी जाएगी।

आज की रात चंद्रमा के प्रकाश में औषधीय गुण मौजूद रहते हैं, जिनमें कई असाध्य रोगों को दूर करने की शक्ति होती है। शरद पूर्णिमा की रात धन व वैभव की देवी माता लक्ष्मी का पृथ्वी लोक पर आगमन होता है।

इसी लिए सनातनी आज पवित्र गंगा स्नान, दान-पुण्य, पूजा-पाठ और रात्रि में लक्ष्मी, कुबेर एवं इंद्र की पूजा, रात्रि जागरण एवं घी का दीपक पूरी रात जलाएंगे।

सर्वार्थ सिद्धि योग में शरद पूर्णिमा आज

ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने बताया, आज रविवार को आश्विन शुक्ल पूर्णिमा में शरद पूर्णिमा का पर्व रेवती और अश्विनी नक्षत्र के युग्म संयोग तथा हर्षण योग में मनायी जाएगी। इस पुण्य फलदायी योग में शुभ व मंगल कार्य करने से शुभ कार्य जल्द सिद्ध होता है। शरद पूर्णिमा के दिन खरीदारी और नए काम आरंभ करना शुभकर होगा।

चन्द्र की किरणें बरसाएंगी औषधीय अमृत

पंडित झा ने कहा कि शरद पूर्णिमा के रात्रि में चंद्रमा की सोममय रोशनी पेड़-पौधों और वनस्पतियों पर पड़ने से उनमें भी अमृत का संचार हो जाता है। रात में चन्द्र की किरणों से जो अमृत वर्षा होती है, उसके फलस्वरुप घरों के छतों पर रखा खीर अमृत सामान हो जाती है।

उसमें चंद्रमा से जनित दोष शांति, रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि और आरोग्य प्रदान करने की क्षमता आ जाती है। यह प्रसाद ग्रहण करने से प्राणी को मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।

चंद्र की पीड़ा के कारण जातक को कफ, खांसी, सर्दी-जुकाम, अस्थमा, फेफड़ों और श्वांस के रोग संबंधी परेशानियां रहती है। शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्र का अवलोकन व आराधना तथा शीतल खीर का प्रसाद ग्रहण करने से इन रोगो से मुक्ति मिलती है।

शरद पूर्णिमा का पौराणिक महत्व

ज्योतिषी झा ने बताया कि आश्विन पूर्णिमा यानि शरद पूर्णिमा देवों के चतुर्मास के शयनकाल का अंतिम चरण होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था। इसलिए सुख, सौभाग्य, आयु, आरोग्य और धन-संपदा की प्राप्ति के लिए इस पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। इस रात को मां लक्ष्मी स्वर्ग लोक से पृथ्वी पर प्रकट होती हैं।

शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की पूजा, विष्णुसहस्रनाम का पाठ, चौमुख दीपक जलाने से श्रद्धालु में घर में सुख शांति, आर्थिक संकटों से छुटकारा, सुख-समृद्धि में निरंतर इजाफा होता है।

शरद पूर्णिमा पूजा का शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:11 बजे से 11:56 बजे तक

शुभ योग मुहूर्त: दोपहर 12:58 बजे से 02:23 बजे तक

प्रदोष काल महूर्त: शाम 05:12 बजे से 07:53 बजे तक

अमृत मुहूर्त: शाम 06:48 बजे से रात्रि 08:23 बजे तक

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *