शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए जल में मिलाएं ये 5 चीजें, मिलेगा सुख-समृद्धि और शांति का वरदान
शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ दिखाई देता है और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इस दिन चंद्रदेव को अर्घ्य देना भी शुभ माना जाता है।
शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए जल में थोड़ा-सा कच्चा दूध मिलाया जा सकता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में दूध को शुद्धता, शीतलता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष में भी दूध का संबंध चंद्रमा से बताया गया है। मान्यता है कि चंद्रदेव को दूध मिश्रित जल अर्पित करने से मानसिक शांति और सकारात्मकता की कामना पूरी होती है।
अक्षत का अर्थ है ऐसे साबुत चावल, जो टूटे हुए न हों। इन्हें पूर्णता, मंगल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रदेव की पूजा करते समय अक्षत अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
सफेद रंग को शांति, पवित्रता और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए चंद्रदेव की पूजा में सफेद फूलों का विशेष महत्व बताया जाता है। शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा को अर्घ्य देते समय सफेद फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे मन में शांति और जीवन में सकारात्मकता की कामना की जाती है। आप अपनी उपलब्धता के अनुसार सफेद फूल चुन सकते हैं और उन्हें श्रद्धापूर्वक पूजा में अर्पित कर सकते हैं।
मिश्री और चीनी मिठास का प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन्हें शुभता और मधुरता से जोड़ा जाता है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रदेव को अर्घ्य देते समय कुछ लोग जल में थोड़ी मिश्री मिलाते हैं या पूजा में अलग से मिश्री अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इससे जीवन में सुख, शांति और पारिवारिक सौहार्द बना रहता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

