नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडेशन (एनबीए) से राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों को मान्यता दिलाने के लिए सरकार ने तैयारी तेज कर दी है। एनबीए से मान्यता प्राप्त नहीं होने से इन इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्र-छात्राओं को आगे की पढ़ाई के लिए देश-विदेश के शीर्ष संस्थानों में नामांकन लेने में दिक्कतें आ रही हैं।
इस साल मई में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने एनबीए से मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेजों की सूची जारी की थी जिसमें प्रदेश के एक भी राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज को जगह नहीं मिली थी।
इसके बाद विज्ञान, प्रावैधिकी तथा तकनीकी शिक्षा विभाग ने एनबीए के मानकों के अनुरूप कालेजों को तैयारी कराकर मान्यता दिलाने हेतु विशेषज्ञों की कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने सभी 38 इंजीनियरिंग कालेजों में जाकर स्टडी रिपोर्ट तैयार की है जिसमें आधार पर एनबीए से मान्यता के लिए आवेदन किया जाएगा।
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि एनबीए से राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों को मान्यता प्राप्त करने के लिए कुछ प्रमुख शर्तें और मानदंड हैं जिन्हें कॉलेजों ने लगभग पूरा किया है।
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से संबंधित पाठ्यक्रमों की विधिवत अनुमोदन जरूरी है जो मिल चुकी है। चूंकि केवल फुल-टाइम (नियमित) बीटेक/बीई पाठ्यक्रमों को ही एनबीए की मान्यता मिलती है। इसके लिए सभी कॉलेजों को गाइडलाइन जारी किया गया है। प्रत्येक कॉलेज में ग्रेजुएट बैच की अनिवार्यता है।
मान्यता के लिए आवेदन करने से पहले उस पाठ्यक्रम से कम से कम दो बैच के छात्र सफलतापूर्वक उत्तीर्ण होकर निकल चुके होने चाहिए। इस शर्त को भी सभी कालेज पूरा करते हैं। एनबीए के मानकों के अनुसार संस्थान में नियमित, योग्य और निर्धारित संख्या में संकाय सदस्यों की नियुक्ति होनी चाहिए। इसके लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है।
शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने का कार्य
आधुनिक प्रयोगशालाएं और बुनियादी ढांचा को विकसित किया जा रहा है। कालेजों में बेहतर प्लेसमेंट की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही उच्च स्तरीय प्रयोगशाला, आधुनिक उपकरण एवं लाइब्रेरी की स्थापना और शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने का कार्य जोरों पर है।
एनबीए के पास सेल्फ असेसमेंट रिपोर्ट (एसएआर) जमा कराने का निर्देश सभी कॉलेजों को दिया गया है। सभी मानदंडों की जांच के लिए एनबीए की एक विशेष विशेषज्ञ टीम दिसंबर में बिहार के दौरे पर आएगी।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

