मेरठ में इनर रिंग रोड का खाका तैयार, शताब्दीनगर-जुर्रानपुर हिस्से के लिए दीपावली के बाद होगी जमीन की खरीद
शहर के यातायात दबाव को कम करने के लिए प्रस्तावित इनर रिंग रोड (5.7 किमी लंबाई) के निर्माण की योजना तैयार की गई है। वेदव्यासपुरी से हापुड़ रोड तक इस रिंग रोड का निर्माण तीन हिस्से में किया जाएगा।
दो हिस्से में वेदव्यासपुरी से दिल्ली रोड और शताब्दीनगर से जुर्रानपुर रेलवे लाइन के पास तक 3.6 लंबी सड़क के लिए भूमि अधिग्रहण मेडा करेगा जबकि निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी करेगा। इस हिस्से में पूठा के पास रेलवे लाइन पर ओवरब्रिज बनेगा, जिसका निर्माण सेतु निगम कराएगा।
वहीं 2.11 किमी लंबा तीसरा हिस्सा यानी जुर्रानपुर गांव में रेलवे लाइन पर अर्धनिर्मित ओवरब्रिज से होते हुए हापुड़ रोड तक के निर्माण के लिए भूमि खरीद व सड़क निर्माण लागत की जिम्मेदारी आवास विकास परिषद को दी गई है। जुर्रानपुर रेलवे पर जो अधूरा हवा में लटका हुआ ओवरब्रिज है, उस ढांचे का बचा हुआ कार्य भी आवास विकास परिषद कराएगा।
मेडा अपने हिस्से की सड़क के लिए जमीन खरीद दीपावली के बाद शुरू करेगा। मेडा जमीन की खरीद सबसे पहले शताब्दीनगर से जुर्रानपुर रेलवे लाइन के पास वाले हिस्से के लिए करेगा।
रिंग रोड के प्रथम व दूसरे हिस्से के लिए भूमि खरीद की जिम्मेदारी मेडा को दी गई है, जिस पर 162 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसकी व्यवस्था मेडा ने अपने कोश से कर ली है। वहीं इस हिस्से का निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी को करना है, जिस पर 68 कराेड़ रुपये खर्च होंगे।
जब मेडा जमीन खरीद लेगा तब पीडब्ल्यूडी शासन से धनराशि लेकर सड़क बनाएगा। वहीं जो तीसरा हिस्सा आवास विकास परिषद के जिम्मे है, वह अपनी प्रस्तावित टाउनशिप के अंतर्गत बनाएगा। आवास विकास परिषद भी जल्द जमीन की खरीद शुरू करेगा।
सेक्शन-बी (2.4 किमी): शताब्दी नगर को जुर्रानपुर रेलवे लाइन के पास तक। इसके लिए भी भूमि अधिग्रहण होना है। ये कार्य मेडा के जिम्मे है। इसके लिए भूमि खरीद पर 112 करोड़ रुपये और सड़क निर्माण पर 45 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यानी इस हिस्से पर कुल 157 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
सेक्शन-सी (2.11 किमी): जुर्रानपुर गावं से रेलवे लाइन होते हुए हापुड़ रोड तक को गढ़ रोड तक। यह आवास विकास परिषद की प्रस्तावित टाउनशिप का हिस्सा है। इसलिए इसके निर्माण व अधिग्रहण की जिम्मेदारी आवास विकास परिषद को दी गई है।
वीसी मीना ने समाप्त कराया शासन के 62 करोड़ का इंतजार
दो साल पहले तत्कालीन मेडा उपाध्यक्ष अभिषेक पांडेय के समय फार्मूला तय हुआ था कि जमीन खरीद पर जो 162 करोड़ रुपये खर्च होंगे, उसके लिए 100 करोड़ मेडा देगा और 62 करोड़ रुपये शासन देगा। इसी फार्मूले के तहत शासन को सड़क निर्माण की राशि भी पीडब्ल्यूडी को देनी थी।
शासन से 62 करोड़ रुपये नहीं मिले, जिसके इंतजार में रिंग रोड का प्रस्ताव रखा रह गया। इस देरी और शहर की आवश्यकता को देखते हुए वर्तमान मेडा उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना ने शासन से वार्ता की।
उन्होंने रास्ता निकाला कि 162 करोड़ रुपये की व्यवस्था मेडा स्वयं कर लेगा, शासन सिर्फ पीडब्ल्यूडी को सड़क निर्माण की धनराशि दे। इस नए फार्मूले पर शासन ने हरी झंडी दे दी। इस तरह से अब शासन से 62 करोड़ रुपये का इंतजार का प्रकरण समाप्त हो गया है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

