कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ के बाद 17 लोगों की मौत और 30 से अधिक लोगों के घायल होने की घटना ने भीड़भाड़ वाले धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसके बाद दैनिक जागरण की टीम ने फरीदाबाद के तीन प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों का जायजा लिया। बाटा स्थित फरीदाबाद दुर्गा बाड़ी, सेक्टर-16 स्थित फरीदाबाद कालीबाड़ी और सेक्टर-तीन स्थित प्रोबासी दुर्गा पूजा में हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
दिखाई दिए ये बड़े कदम
पड़ताल में राहत की बात यह रही कि तीनों जगह मुख्य द्वार चौड़े करने, अतिरिक्त रास्ते रखने और प्रवेश द्वारों के आसपास से अतिक्रमण हटाने जैसे कदम दिखाई दिए।
हालांकि, तीनों पंडालों में फायर एनओसी और अग्निशमन सुरक्षा उपकरण नहीं मिले। पूजा समितियों के पदाधिकारियों ने पुलिस, दमकल और एंबुलेंस की व्यवस्था होने का दावा किया, लेकिन निरीक्षण के दौरान ये इंतजाम भी मौके पर नजर नहीं आए।
दुर्गा बाड़ी: चौड़ा मुख्य द्वार, पीछे भी निकास का रास्ता
बाटा स्थित फरीदाबाद दुर्गा बाड़ी में मुख्य द्वार काफी चौड़ा है। प्रवेश द्वार के आसपास वाहनों की पार्किंग और रेहड़ी-पटरी वालों को हटाया गया है, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही बाधित न हो। पंडाल के भीतर भी पर्याप्त जगह दिखाई दी।
इसके अलावा पीछे की तरफ भी रास्ता छोड़ा गया है। इससे भीड़ बढ़ने की स्थिति में श्रद्धालुओं को बाहर निकलने के लिए एक से अधिक विकल्प मिल सकते हैं।
हालांकि, यहां भी फायर एनओसी और अग्निशमन उपकरण नहीं मिले। भीड़ के दबाव या आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए केवल खुले रास्ते पर्याप्त नहीं हैं।
कालीबाड़ी: चार द्वार, प्रसाद के लिए अलग व्यवस्था
सेक्टर-16 स्थित फरीदाबाद कालीबाड़ी में श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए चार द्वार बनाए गए हैं। प्रसाद वितरण के लिए अलग व्यवस्था की गई है, जिससे प्रसाद लेने वालों और पंडाल में आने-जाने वालों की भीड़ को अलग रखने में मदद मिल सकती है।
कई द्वार होने से निकासी के विकल्प बढ़ते हैं, लेकिन इसके लिए उनका खुला रहना और भीड़ का सही प्रबंधन भी जरूरी है। पड़ताल के दौरान यहां फायर एनओसी और अग्निशमन सुरक्षा उपकरण नहीं मिले। पुलिस, दमकल और एंबुलेंस की व्यवस्था भी मौके पर दिखाई नहीं दी
प्रोबासी दुर्गा पूजा: पार्क में पंडाल, पीछे से भी रास्ता
सेक्टर-तीन में प्रोबासी दुर्गा पूजा का पंडाल पार्क की खुली जगह में लगाया गया है। यहां भी मुख्य द्वार चौड़ा है और पीछे से आने-जाने का रास्ता रखा गया है। खुली जगह और अतिरिक्त निकास से भीड़ के दबाव को संभालने में मदद मिल सकती है।
इसके बावजूद अग्निशमन सुरक्षा के इंतजामों की कमी चिंता बढ़ाती है। निरीक्षण के दौरान यहां भी फायर एनओसी और अग्निशमन उपकरण नहीं मिले। आयोजकों ने आपात सेवाओं की व्यवस्था होने की बात कही, लेकिन मौके पर उनकी मौजूदगी नहीं दिखी।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

