दिल्ली में ‘कॉकरोच’ पार्टी के प्रदर्शनों से व्यापारी परेशान, हाई कोर्ट पहुंचे; ₹2,000 करोड़ के नुकसान का दावा

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शनों और उनके बाद लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर व्यापारियों की परेशानी अब अदालत तक पहुंच गई है। बाजारों तक पहुंच बाधित होने, बैरिकेडिंग और यातायात प्रतिबंधों से कारोबार प्रभावित होने का दावा करते हुए व्यापारियों और वकीलों ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि हालिया प्रदर्शनों के कारण व्यापारियों को करीब 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

16 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रदर्शन स्थलों पर नियमों के पालन और विरोध प्रदर्शनों को व्यवस्थित करने की मांग से जुड़ी याचिकाओं पर अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को तय की है। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से इस मामले में निर्देश लेकर अपना पक्ष रखने को कहा था। अदालत ने फिलहाल प्रदर्शन स्थलों पर मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP लागू करने के लिए कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया।

व्यापारियों की क्या है मांग?

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर पूरी तरह रोक लगवाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रदर्शन के दौरान बाजारों, अदालतों और आम नागरिकों की आवाजाही प्रभावित न हो। वे चाहते हैं कि निर्धारित प्रदर्शन स्थलों पर पहले से मौजूद नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन कराया जाए।

व्यापारी पक्ष की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कनॉट प्लेस जैसे प्रमुख व्यावसायिक इलाकों तक पहुंच बाधित होने से कारोबार पर असर पड़ा है। हालांकि, 2,000 करोड़ रुपये के नुकसान का आंकड़ा याचिकाकर्ताओं का दावा है; अदालत ने इस पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

प्रदर्शन और कारोबार के बीच संतुलन पर जोर

दिल्ली में हाल के दिनों में CJP, छात्र संगठनों और अन्य समूहों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किए हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की पाबंदियों, बैरिकेडिंग और आवाजाही पर नियंत्रण को लेकर विवाद सामने आया है। एक ओर प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की बात कर रहे हैं, वहीं व्यापारियों का कहना है कि विरोध के कारण आम जनजीवन और व्यावसायिक गतिविधियां बाधित नहीं होनी चाहिए।

अब सभी की नजरें 16 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर हैं। अदालत में यह मुद्दा अहम रहेगा कि विरोध प्रदर्शनों के प्रबंधन के लिए मौजूदा नियमों को किस तरह लागू किया जाए, ताकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और व्यापारियों तथा आम नागरिकों की सुविधाओं के बीच संतुलन बना रहे।

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