ओडिशा में मिले ओरांगुटान शावकों की सेहत में सुधार, DNA जांच से पता चलेगा मूल देश
ओडिशा के बालासोर जिले के जंगल से बरामद किए गए पांच ओरांगुटान शावकों की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हो रहा है। सभी शावकों को फिलहाल भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में तापमान नियंत्रित क्वारंटीन सुविधा में रखा गया है। अधिकारियों के मुताबिक, पूरी तरह स्वस्थ होने और क्वारंटीन अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें बड़े बाड़े में स्थानांतरित किया जाएगा।
इन पांचों ओरांगुटान को 8 सितंबर को बालासोर के बिचित्रपुर वन क्षेत्र से रेस्क्यू किया गया था। इसके बाद से वन विभाग और विशेषज्ञों की निगरानी में उनका इलाज और देखभाल की जा रही है।
DNA जांच से पता चलेगा मूल देश
शावकों के मूल स्थान को लेकर अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। उनकी प्रजाति और भौगोलिक मूल की पहचान के लिए DNA जांच की तैयारी की जा रही है। शुरुआती आकलन में इनके सुमात्रा से होने की आशंका जताई गई है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष आनुवंशिक जांच के बाद ही सामने आएगा।
इंडोनेशिया के वन मंत्रालय ने भी भारतीय अधिकारियों से संपर्क कर इन ओरांगुटान के मूल की पुष्टि और जरूरत पड़ने पर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया में सहयोग की पेशकश की है। इंडोनेशियाई सरकार के अनुसार, यदि DNA जांच में इनके इंडोनेशिया से होने की पुष्टि होती है तो इनके प्रत्यावर्तन की दिशा में आगे कदम उठाए जा सकते हैं।
वन्यजीव तस्करी के एंगल से जांच
ओडिशा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF), वन विभाग और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) मिलकर मामले की जांच कर रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ये ओरांगुटान बालासोर के जंगल तक कैसे पहुंचे और क्या इसके पीछे वन्यजीव तस्करी से जुड़ा कोई नेटवर्क है।
फिलहाल शावकों की देखभाल और स्वास्थ्य निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, उनकी स्थिति में सुधार होने के बाद ही आगे की व्यवस्था पर फैसला लिया जाएगा।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

