यूपी की ऐतिहासिक लाल इमली मिल: पांच अंग्रेजों ने की थी शुरुआत, दुनिया में मशहूर हुए कानपुर के ऊनी कपड़े

1953 Shares

उत्तर प्रदेश के कानपुर की पहचान कभी देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में होती थी। यहां की कपड़ा मिलों ने शहर को ‘पूरब का मैनचेस्टर’ कहलाने में अहम भूमिका निभाई। इन्हीं ऐतिहासिक औद्योगिक संस्थानों में एक नाम लाल इमली मिल का भी है, जिसका इतिहास ब्रिटिश शासनकाल से जुड़ा हुआ है। कभी अपने बेहतरीन ऊनी कपड़ों के लिए मशहूर यह मिल आज कानपुर की औद्योगिक विरासत का प्रतीक बन चुकी है।

1876 में हुई थी स्थापना

लाल इमली मिल की शुरुआत वर्ष 1876 में हुई थी। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, जॉर्ज एलन, डब्ल्यू.ई. कूपर, गैविन एस. जोन्स, डॉ. कोंडन और बेवन पेटमैन ने मिल की स्थापना में भूमिका निभाई थी। उस समय इसे ‘कॉनपोर वूलन मिल्स’ के नाम से जाना जाता था। इसका शुरुआती उद्देश्य ब्रिटिश सेना के जवानों के लिए कंबल और ऊनी कपड़े तैयार करना था।

कैसे पड़ा लाल इमली नाम?

इस मिल के नाम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। बताया जाता है कि मिल परिसर में लाल रंग की इमली वाला एक पेड़ मौजूद था। इसी पेड़ की पहचान से मिल का नाम ‘लाल इमली’ पड़ गया। समय के साथ यह नाम मिल के उत्पादों और कानपुर की औद्योगिक पहचान से जुड़ गया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *