हाथरस में मानदेय बढ़ने के बाद भी 18 पंचायत सहायकों ने छोड़ी नौकरी, गांवों में कामकाज प्रभावित
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में पंचायत सहायकों की नौकरी छोड़ने का मामला सामने आया है। सरकार ने पंचायत सहायकों का मासिक मानदेय 6,000 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये कर दिया है। इसके बावजूद जिले में 18 पंचायत सहायकों के नौकरी छोड़ने की खबर ने ग्रामीण स्तर पर पंचायत सेवाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई ग्राम पंचायतों में सहायकों के पद खाली होने से सरकारी योजनाओं और रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका है।
सरकार ने 3,000 रुपये बढ़ाया मानदेय
उत्तर प्रदेश सरकार ने सितंबर 2026 से पंचायत सहायकों का मानदेय 6,000 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये प्रतिमाह करने का फैसला किया है। यानी मानदेय में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। यह फैसला प्रदेशभर के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों की मांगों और विरोध-प्रदर्शन के बाद लिया गया।
सरकार ने मानदेय बढ़ाने के साथ पंचायत सहायकों की सेवा सुरक्षा, महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश और कैशलेस इलाज जैसी सुविधाओं से जुड़े फैसले भी घोषित किए हैं। मानदेय का भुगतान सीधे बैंक खातों में करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है।
फिर भी 18 सहायकों ने क्यों छोड़ी नौकरी?
हाथरस में 18 पंचायत सहायकों के नौकरी छोड़ने की खबर के बाद यह सवाल उठ रहा है कि मानदेय बढ़ने के बावजूद कर्मचारी पद पर बने रहने में रुचि क्यों नहीं दिखा रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से इन कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की अलग-अलग वजहों की पुष्टि नहीं होती है।
कम मानदेय, काम का दबाव, भुगतान में देरी या दूसरी नौकरी की तलाश जैसे मुद्दे पंचायत सहायकों की नौकरी से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन इन्हें हाथरस के इन 18 कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने का प्रमाणित कारण नहीं माना जा सकता। इसके लिए संबंधित कर्मचारियों और जिला प्रशासन का पक्ष जानना जरूरी है।
गांवों में पंचायत सेवाओं पर असर
पंचायत सहायक ग्राम पंचायतों में सरकारी योजनाओं से जुड़े काम, ऑनलाइन रिकॉर्ड, डेटा एंट्री और ग्रामीणों को विभिन्न सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराने जैसे कार्यों में सहयोग करते हैं। ऐसे में किसी ग्राम पंचायत में पद खाली होने पर संबंधित कामकाज प्रभावित हो सकता है।
यदि खाली पदों पर समय रहते नियुक्तियां नहीं होती हैं, तो ग्रामीणों को दस्तावेजों, ऑनलाइन आवेदन और पंचायत संबंधी प्रक्रियाओं के लिए अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, जिले में कितनी ग्राम पंचायतों की सेवाएं वास्तव में ठप हुई हैं, इसका स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
अब प्रशासन के सामने क्या चुनौती?
पंचायत सहायकों के रिक्त पदों को भरना और ग्राम पंचायतों का कामकाज सुचारु रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों के कारणों का पता लगाकर यह समझना भी जरूरी है कि मानदेय बढ़ोतरी के बाद भी कर्मचारियों के सामने कौन-सी समस्याएं बनी हुई हैं।
निष्कर्ष: हाथरस में 18 पंचायत सहायकों के नौकरी छोड़ने की खबर ने मानदेय बढ़ोतरी के बावजूद ग्रामीण स्तर पर कर्मचारियों की स्थिति और पंचायत सेवाओं की निरंतरता पर सवाल खड़े किए हैं। अब यह देखना होगा कि प्रशासन रिक्त पदों को भरने और गांवों में सेवाएं सामान्य बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

