महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में इंग्लैंड के क्रिकेटर ओली पोप का बड़ा फैसला, अफगानिस्तान प्रीमियर लीग से नाम लिया वापस

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महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी बहस का असर अब क्रिकेट जगत में भी दिखाई दे रहा है। इंग्लैंड के बल्लेबाज ओली पोप ने अफगानिस्तान प्रीमियर लीग (APL) के पहले सीजन के ड्राफ्ट से अपना नाम वापस ले लिया है। यह फैसला अफगानिस्तान में तालिबान शासन के तहत महिलाओं के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आया है।

क्यों चर्चा में है अफगानिस्तान प्रीमियर लीग?

अफगानिस्तान प्रीमियर लीग का पहला सीजन संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित किए जाने की योजना है। इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए कई इंग्लिश खिलाड़ियों के नाम सामने आए थे। हालांकि, अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों को लेकर चिंता के कारण इंग्लैंड के खिलाड़ियों की संभावित भागीदारी पर सवाल उठने लगे।

इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने तालिबान शासन के तहत महिलाओं के साथ किए जा रहे व्यवहार के विरोध में अफगानिस्तान के खिलाफ द्विपक्षीय सीरीज आयोजित नहीं करने का रुख अपनाया है। ऐसे में फ्रेंचाइजी लीग में इंग्लिश खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर नैतिक सवाल उठ रहे हैं।

ओली पोप के अलावा इन खिलाड़ियों ने भी नाम वापस लिया

13 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, ओली पोप के साथ विल स्मीड और डेविड विली ने भी लीग के ड्राफ्ट से अपना नाम वापस लिया है। वहीं, पूर्व इंग्लिश बल्लेबाज डेविड मलान सहित कुछ अन्य खिलाड़ियों ने ड्राफ्ट के लिए उपलब्ध रहने का फैसला किया है। इससे स्पष्ट है कि इस मुद्दे पर खिलाड़ियों के बीच अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।

ECB ने खिलाड़ियों के नैतिक रुख पर क्या कहा?

इंग्लैंड क्रिकेट के मैनेजिंग डायरेक्टर रॉब की ने कहा कि कानूनी तौर पर खिलाड़ियों को ऐसी प्रतियोगिताओं में खेलने से रोकना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, उन्होंने इसे नैतिक निर्णय बताते हुए कहा कि खिलाड़ियों को इस पहलू पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह व्यक्तिगत रूप से ऐसी लीग में खेलने नहीं जाते, लेकिन अंतिम फैसला खिलाड़ी को ही करना है।

क्रिकेट और महिलाओं के अधिकारों पर बहस

ओली पोप का नाम वापस लेना खेल और मानवाधिकारों के बीच संबंध को लेकर चल रही चर्चा का हिस्सा बन गया है। इस मामले में एक तरफ महिलाओं के अधिकारों को लेकर नैतिक जिम्मेदारी का सवाल है, तो दूसरी तरफ खिलाड़ियों के पेशेवर करियर और व्यक्तिगत निर्णय की स्वतंत्रता भी चर्चा में है।

अफगानिस्तान प्रीमियर लीग में शामिल होने वाले खिलाड़ियों को लेकर आगे भी नजरें बनी रहेंगी। फिलहाल, ओली पोप और अन्य खिलाड़ियों के नाम वापस लेने से टूर्नामेंट से जुड़ी बहस को नया आयाम मिला है।

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