नेपाल में फिर बाढ़ से बढ़ी चिंता, बिहार में गंडक के जलस्तर पर अलर्ट; जानिए क्या है ताजा रिपोर्ट

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नेपाल में भूस्खलन के बाद अचानक आई बाढ़ ने बिहार में भी चिंता बढ़ा दी है। गंडक नदी के जलस्तर को लेकर निगरानी तेज कर दी गई है। हालांकि, बिहार के जल संसाधन विभाग के मुताबिक, फिलहाल राज्य में किसी बड़े बाढ़ संकट का तत्काल खतरा नहीं है। इसके बावजूद नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

रिपोर्टों के अनुसार, 11 अक्टूबर 2026 को नेपाल के गोरखा जिले के चुमनुब्री क्षेत्र में भूस्खलन के कारण बूढ़ी गंडकी नदी का प्रवाह बाधित हो गया था। इसके बाद पानी का बहाव अचानक बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी। इस घटना में घरों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई। नेपाल में प्रशासन ने नदी के निचले प्रवाह वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।

बिहार के जल संसाधन विभाग ने स्थिति का आकलन करते हुए कहा है कि बाढ़ की लहर का असर वाल्मीकिनगर बैराज तक पहुंचने से पहले काफी कम हो सकता है। विभाग के अनुमान के अनुसार, बैराज पर पानी का डिस्चार्ज करीब 50 हजार क्यूसेक से बढ़कर 75 हजार क्यूसेक तक पहुंच सकता है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि नेपाल में बारिश नहीं होने के कारण तत्काल बड़े खतरे की आशंका कम है।

बिहार सरकार के रियल-टाइम बाढ़ निगरानी आंकड़ों के मुताबिक, 12 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे गोपालगंज के डुमरियाघाट में गंडक का जलस्तर 62.11 मीटर दर्ज किया गया। यह चेतावनी स्तर 61.22 मीटर से ऊपर, लेकिन खतरे के स्तर 62.22 मीटर से नीचे था। पश्चिम चंपारण के बगहा में भी नदी चेतावनी स्तर से ऊपर थी, हालांकि वहां जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई।

ऐसे में बिहार में बाढ़ का खतरा कितना बढ़ेगा, यह आने वाले समय में नदी के जलस्तर, पानी के बहाव और मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा। प्रशासन की निगरानी के बीच नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को आधिकारिक चेतावनियों पर ध्यान देने की जरूरत है।

फिलहाल, नेपाल में भूस्खलन से पैदा हुई स्थिति के बाद बिहार में सतर्कता बरती जा रही है। हालांकि, उपलब्ध सरकारी आकलन के अनुसार तत्काल बड़े बाढ़ संकट की आशंका कम है, लेकिन गंडक के जलस्तर पर नजर बनाए रखना जरूरी है।

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