अमरोहा: समाज में ऐसे लोग भी हैं जो बिना किसी स्वार्थ के बेजुबान पशु-पक्षियों की सेवा को अपना दायित्व मानते हैं। अमरोहा के बड़ा बाजार की रहने वाली रोहिनी टंडन ऐसी ही एक पशु-सेविका हैं, जिन्होंने लोगों के विरोध और तानों की परवाह किए बिना घायल और बीमार पशु-पक्षियों की मदद का सिलसिला जारी रखा। अब तक वह करीब 250 पशु-पक्षियों का उपचार कराकर उनकी जान बचा चुकी हैं।
रोहिनी को बचपन से ही पशु-पक्षियों से लगाव रहा है। उनके पिता विमल किशोर टंडन ने उन्हें बेजुबानों की सेवा के लिए प्रेरित किया। परिवार में उन्हें गाय और कुत्ते को भोजन कराने की सीख मिली, जिसका असर उनके जीवन पर ऐसा पड़ा कि शादी के बाद भी पशु-पक्षियों की मदद करने का उनका जुनून कम नहीं हुआ। उनके पति विक्रांत किशोर भी इस काम में उनका साथ देते हैं।
सूचना मिलते ही घायल पशु के पास पहुंचती हैं रोहिनी
किसी पशु या पक्षी के घायल होने की सूचना मिलते ही रोहिनी मदद के लिए मौके पर पहुंचने की कोशिश करती हैं। जरूरत पड़ने पर पुलिस और प्रशासन की सहायता से रेस्क्यू कराया जाता है और गंभीर रूप से घायल पशुओं को उपचार के लिए मुरादाबाद, बरेली, बदायूं और अन्य स्थानों के अस्पतालों तक भेजा जाता है। मामूली चोट होने पर वह कई बार घायल पशु को अपने घर लाकर स्वयं उसकी देखभाल करती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, रोहिनी अब तक करीब 80 आवारा कुत्तों, 38 गायों, 15 बंदरों और आठ कबूतरों समेत लगभग 250 घायल पशु-पक्षियों का इलाज करा चुकी हैं। उनका कहना है कि वह पशु-पक्षियों के दर्द को अपना दर्द समझकर उनकी मदद करती हैं।
लोगों के विरोध के बावजूद नहीं रुकी सेवा
रोहिनी को इस काम के दौरान कई बार स्थानीय लोगों के विरोध और तानों का सामना भी करना पड़ा। कुछ लोग उन्हें अलग नजर से देखते थे और उनके इस काम पर सवाल उठाते थे। लेकिन उन्होंने इन बातों को नजरअंदाज करते हुए पशु-पक्षियों की मदद जारी रखी। उनके परिवार ने भी हर कदम पर उनका साथ दिया।
करीब पांच साल पहले मुरादाबाद में एक घायल घोड़े की सूचना मिलने पर रोहिनी मौके पर पहुंचीं और उसे उपचार के लिए बरेली के अस्पताल में भर्ती कराया। इसी दौरान पीपुल फॉर एनिमल्स मुरादाबाद की अध्यक्ष करूणा शर्मा ने उनके काम को देखा और उन्हें संस्था से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद घायल पशु-पक्षियों के रेस्क्यू और उपचार का उनका काम और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ा।
पुलिस की मदद से कराती हैं रेस्क्यू
रोहिनी के सामने कई बार ऐसी परिस्थितियां भी आईं, जब घायल पशु को रेस्क्यू करने में स्थानीय स्तर पर विरोध हुआ। ऐसे मामलों में वह पुलिस प्रशासन की मदद लेती हैं और पशु को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाकर उसके उपचार की व्यवस्था करती हैं। उनका प्रयास रहता है कि घायल पशु को समय पर इलाज मिल सके।
रोहिनी टंडन की कहानी बताती है कि किसी काम के लिए सिर्फ संसाधन ही नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और लगातार प्रयास भी जरूरी होता है। लोगों की बातों की परवाह किए बिना उन्होंने बेजुबान पशु-पक्षियों की सेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाया और अब तक सैकड़ों जानों को बचाने में योगदान दिया है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

