भारतीय वायु सेना: ऑपरेशन सफेद सागर से बालाकोट स्ट्राइक तक, CAC के पायलटों के अदम्य साहस की गाथा

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भारतीय वायु सेना के इतिहास में 8 अक्टूबर का दिन बेहद खास है। इसी दिन 1932 में भारतीय वायु सेना की स्थापना हुई थी। दशकों के सफर में वायु सेना ने युद्ध अभियानों के साथ-साथ आपदा राहत और मानवीय सहायता के मोर्चे पर भी अपनी भूमिका निभाई है। सेंट्रल एयर कमांड (CAC) इस विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वर्ष 2026 में CAC प्रयागराज में अपने छह दशक पूरे कर रहा है।

CAC की सैन्य विरासत को समझने के लिए ऑपरेशन सफेद सागर का उल्लेख अहम है। वर्ष 1999 में कारगिल संघर्ष के दौरान भारतीय वायु सेना ने ऊंचाई वाले बेहद चुनौतीपूर्ण इलाकों में हवाई अभियान चलाया। इस अभियान में मिग-21, मिग-23, मिग-27, जगुआर, मिराज-2000 और मिग-29 जैसे लड़ाकू विमानों के साथ हेलीकॉप्टर और परिवहन विमान भी शामिल थे। मिराज-2000 ने लेजर-गाइडेड हथियारों के जरिए सटीक हमलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कारगिल के दौरान ऊंचाई, मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां भारतीय वायु योद्धाओं के सामने बड़ी चुनौती थीं। वायु सेना के आधिकारिक इतिहास के अनुसार, ऑपरेशन सफेद सागर को बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अंजाम दिया गया। इस दौरान कई वायु योद्धाओं ने देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।

इसके दो दशक बाद भारतीय वायु सेना ने 26 फरवरी 2019 को बालाकोट में हवाई अभियान को अंजाम दिया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान में शामिल स्क्वाड्रनों के एयरक्रू ने बेहद जटिल मिशन को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पूरा किया। अगले वर्ष इसकी पहली वर्षगांठ पर तत्कालीन एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने उन स्क्वाड्रनों के एयरक्रू के साथ श्रीनगर एयरबेस से पांच विमानों का मिशन उड़ाया था। इसमें एक मिग-21, दो मिराज-2000 और दो सुखोई-30 एमकेआई शामिल थे।

CAC की भूमिका केवल युद्ध अभियानों तक सीमित नहीं रही है। कमांड से जुड़े विमान और कर्मी विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव अभियानों में भी योगदान देते रहे हैं। भूकंप, बाढ़ और अन्य आपदाओं के समय दूरदराज के इलाकों तक सहायता पहुंचाने में वायु शक्ति की अहम भूमिका रही है।

ऑपरेशन सफेद सागर से लेकर बालाकोट तक की यात्रा भारतीय वायु सेना की बदलती परिचालन क्षमता, तकनीकी तैयारी और एयरक्रू के प्रशिक्षण को दर्शाती है। इन अभियानों की सफलता के पीछे केवल कॉकपिट में मौजूद पायलट ही नहीं, बल्कि तकनीकी विशेषज्ञों, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, ग्राउंड स्टाफ और अन्य सहयोगी कर्मियों की सामूहिक भूमिका भी होती है।

सेंट्रल एयर कमांड की यह विरासत आज भी भारतीय वायु सेना की तैयारियों और सेवा भावना का हिस्सा है। कारगिल की ऊंची चोटियों से लेकर आधुनिक हवाई अभियानों तक, CAC से जुड़े वायु योद्धाओं की भूमिका भारतीय वायु शक्ति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज है।

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