सेवा ज्योति यात्रा: उत्तरकाशी से वर्चुअली जुड़े पीएम मोदी, बोले- ‘मैं मिशन के लिए जीता हूं, महत्वाकांक्षा के लिए नहीं’

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 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तरकाशी में अपने वर्चुअल संबोधन में कहा कि वह एंबीशन (महत्वाकांक्षा) के लिए नहीं, बल्कि मिशन के लिए जीने वाले व्यक्ति हैं।

उन्होंने कहा, “मैं चुनाव लड़ने वाला नहीं, चुनाव लड़वाने वाला रहा हूं। मेरे लिए कर्म ही सब कुछ है, कर्म ही मेरा धर्म है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका अधिकार केवल कर्म पर है और वह कर्म को अपना कर्तव्य मानते हैं।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनका उद्देश्य व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि निर्धारित लक्ष्य और कर्तव्य के प्रति समर्पण रहा है। कर्म और कर्तव्य की भावना के साथ आगे बढ़ते हुए देश की सेवा करना ही उनके लिए प्राथमिकता है।

भारत ने जो विकसित भारत का सपना देखा वह पूरा होगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वर्चुअल संबोधन में कहा कि वर्ष 2026 में भारत ने जो विकसित भारत का सपना देखा है, वह जरूर पूरा होगा। उन्होंने भारत की जनता से अभूतपूर्व, असाधारण, आत्म निर्भर भारत के साथ देश को दुनिया की तीसरी बड़ी इकोनॉमी बनाने तथा गरीबी मिटाने जैसे बड़े लक्ष्य रखने की बात रही।

बुधवार को उत्तरकाशी में ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ और ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल हुए और जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्चुअली जुड़े।

जनता का विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी शक्ति रहा : मोदी

उत्तरकाशीः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि देश ने उन्हें जो विश्वास दिया, वह उनके लिए सबसे बड़ी शक्ति रहा है। उन्होंने कहा, “भारत जैसी पुण्य भूमि कोई और नहीं हो सकती। जिस भारत ने पूरी दुनिया को ज्ञान की रोशनी दी, उसकी सेवा का अवसर मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।”

उन्होंने अपने गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उस समय वह एक मंत्र के साथ काम करते थे कि गुजरात के साथ देश का विकास भी होना चाहिए। तब उनके पास प्रशासनिक व्यवस्था का ज्यादा अनुभव नहीं था, लेकिन जनता का विश्वास था। उन्होंने इसी विश्वास को अपनी ताकत बनाया और जनता को साथ लेकर नीतियां बनाईं तथा उन्हें जमीन पर लागू किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब जनता साथ होती है तो परिणाम भी सामने आते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें यह समझने का अनुभव मिला कि जमीन पर वास्तविक समस्याएं क्या हैं, उनका समाधान क्यों नहीं हो पाता और फाइलें कहां और क्यों अटकती हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में मिला यह अनुभव आज भी उनके काम आ रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में सेवा का विस्तार हुआ और उन्हें देश के ‘प्रधान सेवक’ के रूप में दायित्व मिला। उस समय देश के सामने अनेक चुनौतियां थीं। हर तरफ समस्याएं नजर आती थीं और महंगाई आसमान छू रही थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने नीतियों और योजनाओं के माध्यम से परिस्थितियों को बदलने का प्रयास किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले जब कोई बड़ा संकट आता था तो उसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता था और ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ जैसे शब्दों की चर्चा होती थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने निर्णय लेने और नीतियों को लागू करने की प्रक्रिया को गति देने पर जोर दिया।

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