सोशल मीडिया पर ‘परफेक्ट लाइफ’ दिखाने की होड़ बढ़ा रही मानसिक परेशानी, युवाओं में दिख रहा ‘एस्केपिंग फिनोमिना’

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बरेली: सोशल मीडिया पर अपनी जिंदगी को बेहतर और सफल दिखाने की होड़ युवाओं के लिए मानसिक दबाव का कारण बनती जा रही है। पढ़ाई, करियर और भविष्य से जुड़ी उपलब्धियों को लगातार सोशल मीडिया पर साझा करने के बाद जब अपेक्षित सफलता नहीं मिलती, तो कई युवा इस चिंता में घिर जाते हैं कि दूसरे लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे। बरेली के जिला अस्पताल के मनकक्ष में काउंसिलिंग के लिए पहुंचे युवाओं में भी ऐसी स्थितियां सामने आई हैं।

क्या है ‘एस्केपिंग फिनोमिना’?

मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में इस तरह के छह मामले सामने आए हैं। इनमें ‘एस्केपिंग फिनोमिना’ देखने को मिला। इसका मतलब है कि व्यक्ति वास्तविक जीवन की परेशानी, जिम्मेदारी या तनाव से बचने के लिए किसी काल्पनिक दुनिया या दूसरी गतिविधि का सहारा लेने लगता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया पर लगातार उपलब्धियां दिखाने और दूसरों से अपनी तुलना करने की आदत से मानसिक दबाव बढ़ सकता है। पढ़ाई या करियर में अपेक्षित सफलता न मिलने पर इसका असर एकाग्रता, नींद और आत्मविश्वास पर भी पड़ सकता है।

अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग की एक रिपोर्ट भी बताती है कि युवाओं में सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से जुड़ा हो सकता है। हालांकि सोशल मीडिया के सकारात्मक पहलू भी हैं और इसके प्रभाव हर व्यक्ति पर एक जैसे नहीं होते।

कनाडा जाने की तैयारी कर रहे युवक पर पड़ा असर

बरेली के मझोला क्षेत्र के 21 वर्षीय युवक ने कनाडा जाने की तैयारी के दौरान सोशल मीडिया पर अपनी पढ़ाई और भविष्य से जुड़ी अपडेट साझा की थीं। अंग्रेजी की परीक्षा में असफल होने के बाद उसे इस बात की चिंता सताने लगी कि सोशल मीडिया पर उसके परिचित उसके बारे में क्या सोचेंगे।

धीरे-धीरे उसका तनाव बढ़ा और पढ़ाई भी प्रभावित होने लगी। इसके बाद मनकक्ष में उसकी काउंसिलिंग की गई और जरूरत के अनुसार उपचार दिया गया। 

प्रतियोगी परीक्षा में चयन न होने पर बढ़ी तुलना

भोजीपुरा की 22 वर्षीय युवती प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी। वह सोशल मीडिया पर अपनी पढ़ाई और लक्ष्य से जुड़ी तस्वीरें साझा करती थी। जब उसके साथ तैयारी कर रहे कुछ युवाओं का चयन हो गया और उसका नहीं हुआ, तो उसने खुद की तुलना दूसरों से करनी शुरू कर दी।

इसका असर उसके आत्मविश्वास और पढ़ाई पर पड़ा। बाद में परिवार के माध्यम से उसे मार्गदर्शन और काउंसिलिंग दिलाई गई।

नौकरी की ‘सक्सेस अपडेट’ बनी तनाव की वजह

जगतपुर के 24 वर्षीय युवक ने सोशल मीडिया पर जल्द नौकरी मिलने की बात साझा की थी। कई महीने बीतने के बावजूद सफलता नहीं मिली तो उसे परिचितों के सवालों की चिंता होने लगी। सोशल मीडिया पर अपनी प्रोफाइल और पोस्ट को बेहतर दिखाने में उसका समय बढ़ने लगा।

लगातार तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ने के बाद परिवार उसे मनकक्ष लेकर पहुंचा।

लाइक्स और कमेंट से आत्मविश्वास जोड़ने का असर

शहर के एक कॉलेज की 20 वर्षीय छात्रा सोशल मीडिया पर रील और तस्वीरें पोस्ट करती थी। शुरुआत में अच्छी प्रतिक्रिया मिलने से उसका आत्मविश्वास बढ़ा, लेकिन बाद में लाइक्स और कमेंट कम होने पर वह अपनी लोकप्रियता को लेकर परेशान रहने लगी।

बार-बार फोन चेक करने के कारण उसकी पढ़ाई और नींद प्रभावित होने लगी। इसके बाद उसकी काउंसिलिंग की गई।

विशेषज्ञों की सलाह

सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली जिंदगी अक्सर किसी व्यक्ति के जीवन का केवल एक हिस्सा होती है। इसलिए उसे अपनी वास्तविक जिंदगी से तुलना करना मानसिक दबाव बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सफलता का पैमाना केवल लाइक्स, कमेंट या फॉलोअर्स नहीं होना चाहिए।

अगर किसी युवा में लंबे समय तक तनाव, नींद में बदलाव, पढ़ाई में मन न लगना या सामाजिक गतिविधियों से दूरी जैसे बदलाव दिखाई दें, तो परिवार को उससे बातचीत कर जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

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