अयोध्या: उत्तर प्रदेश सरकार ने पारंपरिक और आधुनिक कारीगरों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 का विस्तार किया है। योजना के तहत पात्र कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण के साथ आर्थिक सहायता और आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराई जा रही है। अयोध्या जिले में पिछले पांच वर्षों के दौरान करीब 5 हजार कारीगर योजना से लाभान्वित हो चुके हैं।
10 दिन की मुफ्त ट्रेनिंग और ₹500 रोज
योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को 10 दिनों का निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण अवधि में प्रत्येक प्रशिक्षु को ₹500 प्रतिदिन, यानी कुल ₹5,000 का मानदेय सीधे बैंक खाते में DBT के माध्यम से दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद अधिकतम ₹15,000 तक की उन्नत टूलकिट भी उपलब्ध कराई जाएगी।
कारोबार के लिए 10 लाख रुपये तक ऋण
प्रशिक्षण के बाद कारीगर अपने व्यवसाय को शुरू करने या उसका विस्तार करने के लिए ₹10 लाख तक ऋण ले सकेंगे। योजना के तहत 15 प्रतिशत तक मार्जिन मनी सब्सिडी और ब्याज सहायता का भी प्रावधान है। आधिकारिक पोर्टल के अनुसार ऋण के लिए छह महीने की स्थगन अवधि और अधिकतम 54 मासिक किस्तों में भुगतान की सुविधा भी दी गई है।
25 ट्रेड योजना में शामिल
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 में पारंपरिक कामों के साथ आधुनिक मांग वाले ट्रेड भी जोड़े गए हैं। योजना में कुल 25 पारंपरिक एवं आधुनिक ट्रेड के कारीगरों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य कारीगरों के मौजूदा हुनर को आधुनिक तकनीक और बाजार की जरूरतों से जोड़ना है।
अयोध्या में पांच हजार कारीगरों को मिला लाभ
अयोध्या में योजना के पहले चरण के तहत पिछले पांच वर्षों में करीब 5,000 कारीगर लाभान्वित हुए हैं। अब योजना के दूसरे चरण में प्रशिक्षण, टूलकिट और स्वरोजगार के लिए ऋण की सुविधा को एक साथ जोड़ा गया है।
योजना का मकसद पारंपरिक हुनर को संरक्षित करने के साथ कारीगरों को आधुनिक तकनीक, पूंजी और बाजार से जोड़ना है, ताकि वे अपने कौशल के आधार पर स्वरोजगार को आगे बढ़ा सकें।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

