हैलोवीन पर कद्दू में क्यों बनाते हैं डरावना चेहरा? ‘जैक-ओ-लैंटर्न’ से जुड़ी है दिलचस्प कहानी

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हर साल 31 अक्टूबर को हैलोवीन मनाया जाता है। इस मौके पर घरों और दुकानों को डरावनी सजावट से सजाया जाता है। लेकिन हैलोवीन की सबसे पहचान वाली चीजों में से एक है डरावने चेहरे वाला जगमगाता कद्दू, जिसे ‘जैक-ओ-लैंटर्न’ कहा जाता है। आखिर कद्दू पर डरावना चेहरा बनाने की शुरुआत कैसे हुई और इसके पीछे कौन सी कहानी है?

इस परंपरा की जड़ें आयरलैंड की पुरानी लोककथाओं और सेल्टिक त्योहार सामहैन (Samhain) से जुड़ी मानी जाती हैं। सामहैन के दौरान ऐसी मान्यता थी कि इस समय जीवित और मृत लोगों की दुनिया के बीच की दूरी कम हो जाती है और भटकती आत्माओं का खतरा रहता है। इसी वजह से लोग डरावने चेहरे बनाकर बुरी आत्माओं को दूर रखने की कोशिश करते थे।

पहले कद्दू नहीं, शलजम में बनाए जाते थे चेहरे

आज अमेरिका समेत कई देशों में कद्दू को खोखला करके उसमें चेहरा बनाया जाता है, लेकिन यह परंपरा मूल रूप से कद्दू से शुरू नहीं हुई थी। आयरलैंड और स्कॉटलैंड में लोग शलजम (Turnip), चुकंदर और दूसरी जड़ वाली सब्जियों को खोखला करके उनमें डरावने चेहरे बनाते थे। इनके अंदर रोशनी रखी जाती थी और इन्हें घरों के दरवाजे या खिड़कियों के पास रखा जाता था।

‘Stingy Jack’ और शैतान की कहानी क्या है?

‘जैक-ओ-लैंटर्न’ नाम के पीछे आयरलैंड की मशहूर लोककथा Stingy Jack की कहानी बताई जाती है। कथा के अनुसार जैक बेहद चालाक व्यक्ति था, जिसने कई बार शैतान को अपनी चाल में फंसाया। उसने शैतान से ऐसी शर्तें मनवा लीं, जिनके चलते उसकी आत्मा को नर्क में न ले जाने का वादा किया गया।

कहानी के मुताबिक जब जैक की मृत्यु हुई तो उसे स्वर्ग में भी जगह नहीं मिली और शैतान ने भी उसे नर्क में स्वीकार नहीं किया। इसके बाद वह अंधेरे में भटकने के लिए मजबूर हुआ। शैतान ने उसे रास्ता दिखाने के लिए जलता हुआ कोयला दिया, जिसे जैक ने खोखले किए गए शलजम के अंदर रख लिया।

इसी कथा से ‘Jack of the Lantern’ और बाद में ‘Jack O’Lantern’ नाम जुड़ने की मान्यता है।

अमेरिका पहुंचकर शलजम की जगह कद्दू ने ली

जब आयरिश और स्कॉटिश प्रवासी अमेरिका पहुंचे तो वे अपने साथ यह परंपरा भी लेकर आए। अमेरिका में कद्दू आसानी से उपलब्ध थे और शलजम की तुलना में बड़े तथा नक्काशी के लिए अधिक सुविधाजनक थे। धीरे-धीरे कद्दू वाले जैक-ओ-लैंटर्न ने लोकप्रियता हासिल कर ली और आज यह हैलोवीन का सबसे पहचानने योग्य प्रतीक बन चुका है।

तो डरावना चेहरा क्यों?

डरावने चेहरे का मूल उद्देश्य सिर्फ सजावट नहीं माना जाता था। लोकविश्वास के अनुसार भयानक चेहरा Stingy Jack और दूसरी बुरी आत्माओं को डराकर दूर रखने का तरीका था। समय के साथ धार्मिक और लोक परंपराएं बदलती गईं और यह रिवाज आधुनिक हैलोवीन की मजेदार सजावट का हिस्सा बन गया।

इस तरह आज हैलोवीन पर दिखाई देने वाला मुस्कुराता या डरावना कद्दू दरअसल कई सदियों पुरानी आयरिश लोकपरंपराओं, सामहैन से जुड़े विश्वासों और ‘Stingy Jack’ की कहानी का मिला-जुला रूप है। हालांकि 2000 साल पुरानी ‘जैक’ की निश्चित ऐतिहासिक कहानी कहना सही नहीं होगा; प्राचीन जड़ों का संबंध सामहैन और उससे जुड़ी परंपराओं से है, जबकि Stingy Jack की लिखित लोककथा बाद के समय में दर्ज हुई।

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