टेलीविजन के शुरुआती दौर में कुछ ऐसे कार्यक्रम भी आए, जिन्होंने दर्शकों के बीच अलग तरह की छाप छोड़ी। करीब 59 साल पहले दूरदर्शन पर शुरू हुआ एक ऐसा ही शो लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया था। दिलचस्प बात यह थी कि शो शुरू होते ही कई लोग टीवी बंद कर देते थे, लेकिन इसके बावजूद यह कार्यक्रम बेहद लोकप्रिय हुआ और नंबर-1 तक पहुंच गया।
उस दौर में टेलीविजन मनोरंजन का प्रमुख माध्यम बन रहा था। सीमित चैनलों और चुनिंदा कार्यक्रमों के बीच किसी शो का बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जाता था। इसी दौर में इस कार्यक्रम ने अपनी अलग पहचान बनाई।
शो की विषयवस्तु और प्रस्तुति ने दर्शकों को आकर्षित किया। हालांकि, इसका अंदाज कुछ लोगों को इतना असहज या अप्रिय लगता था कि कार्यक्रम शुरू होते ही वे टीवी बंद कर देते थे। इसके बावजूद बड़ी संख्या में दर्शक इसे देखते रहे और शो की लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई।
समय के साथ यह कार्यक्रम दर्शकों के बीच इतना चर्चित हुआ कि इसे नंबर-1 कार्यक्रम के तौर पर पहचान मिली। आज, करीब छह दशक बाद भी इस शो का जिक्र टेलीविजन के शुरुआती दौर के यादगार कार्यक्रमों में किया जाता है।
यह कहानी बताती है कि किसी कार्यक्रम की लोकप्रियता केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती कि हर दर्शक उसे पसंद करे। कई बार किसी शो को लेकर होने वाली चर्चा और लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी उसे यादगार बना देती हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

