शिमला: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भर्ती नियमों और पात्रता मानदंड को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती नियम बनाना, उनमें संशोधन करना और किसी पद के लिए पात्रता तय करना नियोक्ता का नीतिगत अधिकार है। कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड में जूनियर टी-मेट (ऑपरेशन विंग) की सीधी भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष से घटाकर 30 वर्ष किए जाने के फैसले को सही ठहराया है।
दरअसल, बिजली बोर्ड ने 16 जुलाई 2014 को अधिसूचना जारी कर जूनियर टी-मेट पद पर सीधी भर्ती की ऊपरी आयु सीमा 18-45 वर्ष से घटाकर 18-30 वर्ष कर दी थी। इस बदलाव को कुछ अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि आयु सीमा घटाने से वे भर्ती के लिए अपात्र हो गए और यह फैसला भेदभावपूर्ण तथा मनमाना है।
बिजली बोर्ड की ओर से अदालत को बताया गया कि आयु सीमा में बदलाव सरकार और सर्विस कमेटी की सलाह तथा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मंजूरी के बाद किया गया था। बोर्ड ने यह भी तर्क दिया कि जूनियर टी-मेट का काम मुख्य रूप से फील्ड से जुड़ा है, जिसमें ऊंचे खंभों पर चढ़ने जैसे शारीरिक रूप से कठिन कार्य शामिल हैं। ऐसे काम के लिए अपेक्षाकृत युवा और फुर्तीले कर्मचारियों की जरूरत को देखते हुए 30 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा तय की गई।
हाई कोर्ट ने कहा कि किसी पद के लिए आयु सीमा तय करना या उसमें बदलाव करना सरकार अथवा नियोक्ता का नीतिगत फैसला है। अदालत इसमें तभी हस्तक्षेप कर सकती है, जब निर्णय में दुर्भावना या प्रक्रिया संबंधी गंभीर खामी सामने आए। केवल इस आधार पर किसी नियम को मनमाना या असंवैधानिक नहीं माना जा सकता कि उसके संशोधन से कुछ अभ्यर्थी आवेदन के लिए पात्र नहीं रह गए।
अदालत ने रिकॉर्ड के आधार पर पाया कि आयु सीमा घटाने की प्रक्रिया में आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था। साथ ही, फील्ड कार्य की प्रकृति को देखते हुए आयु सीमा में बदलाव के पीछे तर्क भी मौजूद था। इसके बाद कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए संशोधित भर्ती नियमों को वैध माना।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

