हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भारत में जन्मी एक महिला की नागरिकता से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि 26 जनवरी 1950 के बाद और 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में जन्म लेने वाला व्यक्ति नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 3 के तहत जन्म से भारतीय नागरिक माना जा सकता है, बशर्ते कानून में दी गई अपवाद वाली स्थितियां लागू न हों।
मामला शीतला देवी से जुड़ा है, जिनके जन्म प्रमाण पत्र में 3 मई 1972 को हिमाचल प्रदेश के पतलीकुहल, मनाली में जन्म दर्ज है। उनके पासपोर्ट आवेदन को पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट में उन्हें नेपाली नागरिक बताए जाने के आधार पर आगे नहीं बढ़ाया गया था। मामले में अलग-अलग पुलिस रिकॉर्ड में उनकी नागरिकता को लेकर विरोधाभासी जानकारी भी सामने आई थी।
हाई कोर्ट ने जन्म प्रमाण पत्र में दर्ज भारत में जन्म की जानकारी को देखते हुए नागरिकता अधिनियम की धारा 3 के प्रावधानों पर विचार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने राज्य को दो सप्ताह के भीतर नया पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट तैयार करने को कहा, जिसमें धारा 3 के प्रावधानों को ध्यान में रखा जाए।
इसके बाद पासपोर्ट प्राधिकरण को नई पुलिस रिपोर्ट के आधार पर महिला के पासपोर्ट आवेदन पर कानून के मुताबिक विचार करना होगा। यानी कोर्ट ने सीधे पासपोर्ट जारी करने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि आवेदन पर दोबारा प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया है।
नागरिकता अधिनियम की धारा 3(1)(a) के अनुसार, 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्मे व्यक्ति को कुछ निर्धारित अपवादों को छोड़कर जन्म से भारतीय नागरिक माना जाता है। मौजूदा मामले में हाई कोर्ट ने इसी प्रावधान के संदर्भ में संबंधित अधिकारियों को आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

