तेज डीजे की आवाज से सावधान, ब्रुगाडा सिंड्रोम और LQTS मरीजों के लिए बढ़ सकता है खतरा

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शादी, जन्मदिन, धार्मिक आयोजन या अन्य समारोहों में तेज आवाज में बजने वाला डीजे केवल कानों के लिए ही नुकसानदायक नहीं हो सकता, बल्कि कुछ खास हृदय संबंधी आनुवंशिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए गंभीर जोखिम भी पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्रुगाडा सिंड्रोम और लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम (LQTS) के कुछ मरीजों में तेज आवाज और अचानक होने वाला शोर हृदय की धड़कन की लय को प्रभावित कर सकता है।

ब्रुगाडा सिंड्रोम हृदय की विद्युत प्रणाली से जुड़ी एक दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति है। इसमें कुछ लोगों को खतरनाक अनियमित धड़कन का जोखिम हो सकता है। वहीं, LQTS में हृदय की विद्युत गतिविधि में बदलाव के कारण तेज और अनियमित धड़कन की समस्या पैदा हो सकती है।

LQTS के कुछ मरीजों में तेज आवाज ट्रिगर बन सकती है

चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार LQTS के सभी मरीजों में तेज आवाज से समान जोखिम नहीं होता। विशेष रूप से LQTS के कुछ आनुवंशिक प्रकारों में अचानक तेज आवाज या चौंकाने वाली ध्वनि से हृदय की लय संबंधी समस्या का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे मरीजों को अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार संभावित ट्रिगर से बचने की सलाह दी जाती है।

तेज आवाज से सामान्य स्वास्थ्य पर भी असर

बहुत तेज शोर लंबे समय तक रहने पर सुनने की क्षमता, नींद और मानसिक आराम को प्रभावित कर सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक शोर से कुछ लोगों में रक्तचाप और हृदय गति पर भी असर पड़ सकता है। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों ने भी तेज डीजे और अत्यधिक शोर को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है।

किन लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए?

ब्रुगाडा सिंड्रोम या LQTS जैसी हृदय की विद्युत प्रणाली से जुड़ी बीमारी से पीड़ित लोगों को तेज आवाज वाले आयोजनों को लेकर अपने हृदय रोग विशेषज्ञ की सलाह का पालन करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को अचानक बेहोशी, तेज धड़कन या अन्य असामान्य लक्षण महसूस हों, तो चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

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