बिहार के बांका जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन यानी मिड-डे-मील की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मेन्यू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराने के दावों और बच्चों की थाली में परोसे जा रहे खाने के बीच अंतर की शिकायतें सामने आई हैं। कहीं भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं, तो कहीं निर्धारित मेन्यू का पालन नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में बच्चों के पोषण और सरकारी योजना की निगरानी व्यवस्था पर चर्चा तेज हो गई है।
कागजों पर तय मेन्यू, भोजन की गुणवत्ता पर सवाल
स्कूलों में मिड-डे-मील का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और उनकी नियमित उपस्थिति को प्रोत्साहित करना है। लेकिन बांका जिले के कुछ सरकारी स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। सितंबर 2026 में शंभुगंज प्रखंड के बरौथा स्कूल में ग्रामीणों की शिकायत के बाद जांच किए जाने की खबर सामने आई थी। जांच के दौरान मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं दिए जाने की बात भी रिपोर्ट की गई।
कभी पानी जैसी दाल, तो कभी सब्जियों की कमी
बांका जिले के शंभुगंज प्रखंड के स्कूलों में अक्टूबर 2025 में भी मिड-डे-मील की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे। उस समय की एक रिपोर्ट में पानी मिली दाल, सब्जियों की कमी और भोजन तैयार करने में देरी जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया था। इससे स्पष्ट होता है कि भोजन की गुणवत्ता और नियमित निगरानी का मुद्दा पहले भी सामने आ चुका है।
राशि और राशन की व्यवस्था भी बनी चुनौती
बांका जिले में मिड-डे-मील योजना के संचालन को लेकर आर्थिक परेशानियों की खबरें भी सामने आई हैं। सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्कूलों को जून से भोजन मद की राशि नहीं मिलने के कारण कई जगहों पर उधार के राशन से भोजन तैयार किया जा रहा था। बाद में अक्टूबर 2026 में राज्य सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना मद में 421.88 करोड़ रुपये के वर्चुअल आवंटन की खबर सामने आई।
हालांकि, राशि के आवंटन और भोजन की वास्तविक गुणवत्ता दो अलग-अलग पहलू हैं। बच्चों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार पौष्टिक भोजन मिल रहा है या नहीं, इसकी निगरानी और नियमित जांच भी उतनी ही जरूरी है।
बच्चों के पोषण से जुड़ा है मामला
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन कई परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और मेन्यू का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। यदि भोजन में निर्धारित सामग्री नहीं दी जा रही है या उसकी गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है, तो संबंधित अधिकारियों को शिकायतों की जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
जांच और जवाबदेही की जरूरत
बांका के स्कूलों में मिड-डे-मील से जुड़ी शिकायतों के बीच नियमित निरीक्षण, भोजन की गुणवत्ता की जांच और खर्च का पारदर्शी रिकॉर्ड बनाए रखना जरूरी है। स्कूल प्रबंधन, भोजन उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है कि बच्चों को तय मानकों के अनुसार भोजन मिले।
फिलहाल, कागजों पर दर्ज मेन्यू और थाली में परोसे जाने वाले भोजन के बीच अंतर की शिकायतें योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाती हैं। संबंधित स्कूलों की स्थिति की पुष्टि और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही लापरवाही की वास्तविक सीमा स्पष्ट हो सकेगी। सबसे अहम बात यह है कि बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन नियमित रूप से मिले।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

