सुपर अल नीनो, पराली और सर्दियां… दीवाली से पहले दिल्ली-यूपी और हरियाणा समेत 5 राज्यों की बढ़ी चिंता

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 सर्दियां चौखट पर खड़ी हैं, लेकिन अल-नीनो का साया दरवाजा रोककर खड़ा है। इसके साथ ही पराली जलाने का मौसम भी नजदीक आ गया है। ऐसे में देश की राजधानी दिल्ली समेत इससे सटे राज्य उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान की हवा बदलने वाली है।

बारिश के होने से हवा में जमा प्रदूषक तत्व धुल जाते हैं, लेकिन सुपर अल-नीनो के चलते बारिश की संभावना कम हो गई है। ऐसे में पराली के धुएं से प्रदूषण के और भी ज्यादा बढ़ने की आशंका है।

प्रशांत महासागर का तापमान 3-डिग्री बढ़ा

सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) के फाउंडर और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (NIAS) में चेयर प्रोफेसर गुफरान बेग ने कहा, ‘हम सुपर अल नीनो का सामना कर रहे हैं, जो इस सदी की अनोखी घटना है।’

प्रोफेसर गुफरान बेग ने कहा, ‘प्रशांत महासागर का तापमान पहले ही 3 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा बढ़ चुका है। इससे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस कम होंगे। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के ज्यादा होने से दिल्ली में बारिश होती है और कुछ समय के लिए प्रदूषक साफ हो जाते हैं, लेकिन वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कम होने से प्रदूषण का जमावड़ा ज्यादा होगा।’

सर्दियों के मौसम में कम पड़ेगी ठंड

प्रोफेसर गुफरान बेग का मानना कि इस साल सर्दियां हल्की रहने की उम्मीद है क्योंकि तापमान में बहुत ज्यादा गिरावट की संभावना नहीं है।

बेग ने कहा, ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस कम होने की वजह से हवा की गति धीमी होने की संभावना है, जिससे प्रदूषक तत्व जमा होंगे और हवा स्थिर हो जाएगी।’

सुपर अल नीनो की वजह से जिस तरह इस बार सितंबर महीने में भी मई-जून जैसी गर्मी पड़ रही है। ऐसे में इस बार ठंड के मौसम में भी तापमान में ज्यादा गिरावट होने का अनुमान नहीं लगाया जा रहा है।

पराली के जलने से खराब होगी हवा

देश में ज्यादातर अक्टूबर के महीनों में खेतों में फसल की कटाई शुरू होती है, इसके बाद ज्यादातर किसान पराली जलाते हैं, जिससे प्रदूषण इतना बढ़ जाता है, उस हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। इसके साथ ही ठंड का मौसम और पराली का धुआं हवा को और भी खराब कर देता है।

अभी ठंड का मौसम आया भी नहीं है कि पराली जलाने के मामले भी सामने आने लगे हैं। 15 से 23 सितंबर के बीच पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, यूपी और मध्य प्रदेश में ऐसे 47 मामले सामने आ चुके हैं।

पराली जलाने का सबसे ज्यादा समय दीवाली के आसपास होता है, जब सर्दियां शुरू हो रही होती हैं। इस बार दीवाली 8 नवंबर की है और अभी से पराली जलाने की घटनाएं सामने आने लगी हैं।

अभी खेतों में आग लगने की घटनाएं कम हैं, लेकिन अक्टूबर में इनकी रोजाना संख्या बढ़ेगी और नवंबर के शुरुआती 10 दिनों में यह सबसे ज्यादा होगी। आमतौर पर पराली जलाने का काम 15 सितंबर से 30 नवंबर के बीच होता है।

पराली जलाने की घटनाओं में कमी

खेतों में पराली जलाने की घटनाओं में हर साल कमी दर्ज हो रही है, लेकिन हवा को बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर समाधान पर ध्यान देने की जरूरत है।

  • पंजाब में पिछले साल खेतों में आग लगने की 5,114 घटनाएं हुईं, जो 2024 में 10,909 थीं।
  • हरियाणा में 2024 में पराली जलाने की 1,406 घटनाएं दर्ज की गईं, जो कि 2025 में घटकर 662 हो गईं।
  • उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं 2024 में 6,142 से बढ़कर 2025 में 7,290 हो गईं।
  • राजस्थान में पिछले साल 2,890 मामले सामने आए, जबकि 2024 में यह संख्या 2,772 थी।
  • दिल्ली में पराली जलाने के मामले 2024 में 13 से घटकर 2025 में 5 रह गए।

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