तीन बच्चों को गंगा नदी में डुबोकर मारने के मामले में फांसी की सजा पाई मां प्रियंका और सह आरोपित (प्रेमी) आशीष उर्फ डैनी को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरी कर दिया।
हाई कोर्ट ने बाल गवाह सोनू को गवाही से खारिज किया, उसके बयान आठ दिन बाद दर्ज किए जाने, महत्वपूर्ण गवाह प्रधान को अदालत में पेश न करने और विवेचना को गंभीर खामियों के आधार पर सत्र न्यायालय का फैसला रद कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन दोनों आरोपियों के विरुद्ध आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
आरोप था कि प्रियंका ने आशीष के साथ मिलकर अपने चारों बच्चों को नदी में डूबने की साजिश रची। तीन बच्चों की मौत हो गई, जबकि सबसे बड़ा बेटा सोनू बच गया। अभियोजन ने सोनू को घटना का प्रत्यक्षदर्शी बताते हुए उसकी गवाही को मुकदमे का प्रमुख आधार बनाया था।
एक नजर में घटनाक्रम
- घटना: 27 जून 2024
- घटनास्थल: ताल्हेपुर के पास सेंगर नदी
- इनकी मौत (बच्चे): माधव, आदित्य और मंगल
- जीवित बच्चा: सोनू
- मुकदमा: 27 जून 2024 की शाम
- बाल गवाह का बयान: पांच जुलाई 2024
- आरोपपत्र: 16 जुलाई 2024
- आरोप तय: 22 अगस्त 2024
- सत्र न्यायालय का फैसला: पांच और 10 जुलाई 2025
- निचली अदालत की सजा: प्रियंका को फांसी, आशीष को उम्रकैद
- हाई कोर्ट का फैसला: दोनों सभी आरोपों से बरी
पहली सूचना देने वाले ग्राम प्रधान को नहीं किया पेश
शव मिलने की सबसे पहली सूचना प्रधान जितेंद्र भूषण ने पुलिस को दी थी। पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और पंचायतनामा व पोस्टमार्टम की कार्रवाई कराई। ग्राम प्रधान को मुकदमे में गवाही के लिए पेश नहीं किया।
प्राथमिकी दर्ज करने वाले मृत बच्चों के चाचा मनीष की गवाही को भी हाई कोर्ट ने भरोसेमंद नहीं माना। मनीष ने पहले सोनू से मिलने की बात कही, जबकि दूसरी जगह प्रधान व अन्य स्थानों पर गिरफ्तारी की दलील का उल्लेख किया।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

