गणेश उत्सव के दौरान देशभर में श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद अनंत चतुर्दशी पर प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। हिमाचल प्रदेश के ऊना में इस परंपरा का एक अलग रूप देखने को मिला, जहां मेटल से बनी गणपति प्रतिमा का अनोखे तरीके से विसर्जन किया गया।
यह प्रतिमा पारंपरिक मिट्टी की प्रतिमाओं से अलग है। मेटल से निर्मित होने के कारण इसे पानी में स्थायी रूप से विसर्जित करने के बजाय विशेष प्रक्रिया के तहत विसर्जन की रस्म पूरी की गई। इसके बाद गणपति प्रतिमा को दोबारा मंदिर में स्थापित किया जाएगा।
मेटल की प्रतिमा का हुआ अनोखा विसर्जन
ऊना में गणेश उत्सव के दौरान स्थापित मेटल के गणपति की पूजा के बाद विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की गई। श्रद्धालुओं ने धार्मिक परंपराओं और विधि-विधान के साथ बप्पा को विदाई दी।
मेटल की प्रतिमा को पानी में डुबोकर छोड़ने के बजाय विसर्जन की प्रतीकात्मक प्रक्रिया अपनाई गई। इसका उद्देश्य धार्मिक परंपरा का पालन करने के साथ प्रतिमा को सुरक्षित रखना है।
विसर्जन के बाद फिर मंदिर में होगी स्थापना
विसर्जन की रस्म पूरी होने के बाद गणपति प्रतिमा को दोबारा मंदिर में लाया जाएगा। इस तरह बप्पा की विदाई के बाद फिर से मंदिर में उनकी स्थापना होगी।
इस अनोखी परंपरा ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। जहां सामान्य तौर पर गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन उत्सव के समापन का प्रतीक होता है, वहीं मेटल की प्रतिमा के मामले में धार्मिक रस्म के बाद उसे सुरक्षित रखकर दोबारा पूजा के लिए स्थापित किया जाता है।
पर्यावरण के लिहाज से भी अलग पहल
मेटल की स्थायी प्रतिमा को जलाशय में छोड़ने के बजाय प्रतीकात्मक विसर्जन करना पर्यावरणीय दृष्टि से भी एक अलग पहल के रूप में देखा जा सकता है। इससे प्रतिमा को नुकसान पहुंचाए बिना धार्मिक परंपरा को निभाने का रास्ता मिलता है।
ऊना में गणपति विसर्जन का यह तरीका श्रद्धा और परंपरा के साथ प्रतिमा के संरक्षण का अनूठा उदाहरण बना।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

