पाकिस्तान नहीं बहेगा भारत का पानी, लद्दाख की बंजर जमीन को हरा-भरा करेंगे ग्लेशियर; 5 महीने में तैयार होंगे चार तालाब
लद्दाख प्रशासन ने जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। लेह जिले के स्पितुक फरका में व्यर्थ बहने वाले स्टोक ग्लेशियर के पानी से बंजर जमीन को हरा करने का अभियान शुरू किया गया है।
अब इन जलाशयों से सैकडों एकड़ जमीन को कृषि योग्य बनाया जा रहा है। पहले इस ग्लेशियर का पानी नदी-नालों से होता हुआ सिंधु नदी में मिलकर पाकिस्तान चला जाता था।
3200 लीटर पानी को मोडकर झील को दिया जा रहा पुनर्जीवन
लद्दाख प्रशासन अब अपने ग्लेशियरों व नदियों के कतरा-कतरा पानी को लद्दाख के लोगों की जरूरत को पूरा करने के लिए इस्तेमाल करने का अभियान चला रहा है।
इसी कड़ी में रुपशो खारनाक ग्लेशियर से रोजाना बहने वाले 3200 लीटर पानी को भी मोड़कर सिकुड़ रही सो कार झील को पुनर्जीवन दिया जा रहा है।
बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर से पहले अपनी नदियों के पानी के इस्तेमाल में पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि बड़ी बाधा थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने ग्लेशियर के पानी के संरक्षण की परियोजना को प्रदेश में कृषि को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया है।
उपराज्यपाल ने इसे एक बड़ी उपलब्धि करार देते हुए बताया कि व्यर्थ होने वाले इस पानी से एक हजार एकड़ जमीन पर खेती करने में मदद मिलेगी।
10 अप्रैल को शुरू हुई थी शुरुआत
उन्होंने बताया कि चारों जलाशयों के निर्माण कार्य की शुरुआत इसी वर्ष 10 अप्रैल को हुई थी। ग्लेशियर से पिघलने वाले पानी से पहला जलाशय 21 जून तक भर गया था।
दूसरा 19 जुलाई को, तीसरा 24 अगस्त तक और चौथा जलाशय नौ सितंबर तक भर गया। इस पानी को अब लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
बनाए जा रहे चैक डैम
लद्दाख में शुरू से जल समस्या विकराल रही है। इस समय उपराज्यपाल प्रशासन इसके समाधान में जुटा है। इस अभियान के तहत नदियों में पानी को संग्रहित करने के लिए कुदरती तरीके से चैक डैम बनाए जा रहे हैं।
गर्मी के मौसम में लद्दाख के ऊपरी इलाकों में ग्लेशियरों की बर्फ तेजी से पिघलने लगती है। चैक डैम पर जमा होने वाले पानी का इस्तेमाल लद्दाख के कई हिस्सों में जल समस्या का समाधान करने के लिए किया जा रहा है।
2.4 करोड़ लीटर जल भंडारण क्षमता
स्पितुक फरका में बनाए गए ये चार जलाशय 60 मीटर लंबे, 40 मीटर चौड़े और दो मीटर गहरे हैं। इनमें करीब 60 लाख लीटर ग्लेशियर का पानी संग्रहित करने की क्षमता है। चारों जलाशयों की संयुक्त जल भंडारण क्षमता लगभग 2.4 करोड़ लीटर की है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

