जमीन से जुड़े फर्जीवाड़ा मामले में पूर्व विधायक उमाकांत यादव को इलाहाबाद HC से राहत, मिली जमानत
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फर्जी चकबंदी आदेश के जरिए जमीन के नामांतरण मामले में अभियुक्त पूर्व विधायक उमाकांत यादव को जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकलपीठ ने यह आदेश देते हुए कहा कि दूसरी जमानत अर्जी है। पहली 21 फरवरी 2023 को वापस लेने के आधार पर खारिज हुई थी, गुण-दोष पर विचार नहीं हुआ था।
12 मार्च 2020 से जेल में है
कोर्ट ने कहा कि आवेदक 12 मार्च 2020 से जेल में है, अब तक आरोप भी तय नहीं हुआ है, ट्रायल नहीं चल रहा है। ऐसे में जेल में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शीघ्र सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन है। सह-अभियुक्त चकबंदी अधिकारी कामता प्रसाद की आपराधिक पुनरीक्षण में अंतरिम आदेश भी है। आवेदक बीमार और वृद्ध है। इन परिस्थितियों में जमानत मंजूर की जाती है।
क्या है पूरा मामला?
पूर्व विधायक के खिलाफ वर्ष 2027 में थाना लाइन बाजार थाना जौनपुर में केस दर्ज किया गया था। आरोप है कि उमाकांत ने 24 दिसंबर 1975 के अपंजीकृत बैनामा के आधार पर गांव नटौली की गाटा संख्या 525 और 534 पर दावा किया। चकबंदी अधिकारी ने 26 अक्टूबर 1994 को आपत्ति स्वीकार कर उनका नाम दर्ज करने का आदेश दिया। आरोप है कि यह आदेश फर्जी था और सीएच-23 में दर्ज नहीं है, इसके बावजूद 31 मई 2016 को चकबंदीकर्ता की रिपोर्ट पर 31अगस्त 2016 को नामांतरण कर दिया गया।
14 अगस्त 2017 को FIR दर्ज हुई थी
शिकायतकर्ता संजीव कुमार जायसवाल ने पुनरीक्षण दायर किया, जो 26 दिसंबर 2016 को एकपक्षीय स्वीकार हुआ। इसके खिलाफ केस बहाल किए जाने की प्रार्थना 14 अगस्त 2017 को खारिज होने के बाद एफआईआर दर्ज हुई थी।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

