वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है। यह साफ तौर पर बताता है कि भारत की अर्थव्यवस्था पश्चिम एशिया में युद्ध और डोनल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों के बावजूद तेज गति से आगे बढ़ रही है।हालांकि, चुनौतियां बनी हुईं हैं। ऊंची ऊर्जा कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत के लिए जरूरी है कि वह अपने विदेशी मुद्रा भंडार को और मजबूत बनाए। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर देशवासियों से सोने की खरीदारी, विदेश यात्राओं और विदेश में डेस्टिनेशन वेडिंग से बचने की अपील की है।इन तीनों चीजों में डॉलर खर्च होता है और हर एक डॉलर का खर्च रुपये को कमजोर करता है। सोने की खरीदारी, विदेश यात्राएं और डेस्टिनेशन वेडिंग कैसे देश की आर्थिक और रणनीतिक चुनौतियों को गंभीर बनाती हैं इसकी पड़ताल आज प्रासंगिक है।भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल और अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है। वैश्विक तनाव और अनिश्चितता के समय डॉलर की मांग बढ जाती है। गैर-जरूरी सोना खरीदने या विदेश यात्रा करने से भारतीय रुपया डॉलर में बदलकर देश से बाहर चला जाता है।जब हम भारी मात्रा में सोना आयात करते हैं या विदेश में खर्च करते हैं, तो भारत का व्यापार घाटा बढ़ता है और भारतीय रुपये की कीमत में गिरावट आती है। रुपया कमजोर होने से आयात महंगा होता है।प्रधानमंत्री का मुख्य उद्देश्य है कि जो पैसा भारतीय विदेश में जाकर होटलों, एयरलाइंस और टूरिज्म कंपनियों पर खर्च करते हैं, वह पैसा भारत के भीतर ही रहे। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा मिलता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

