चंदवा प्रखंड के माल्हन पंचायत अंतर्गत केकराही गांव में मंगलवार को एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने सड़क और विकास के तमाम दावों पर सवाल खड़ा कर दिया। बबिता देवी का शव लेकर गांव पहुंची एंबुलेंस रास्ते में कीचड़ में इस कदर फंस गई कि वह गांव तक नहीं पहुंच सकी। आंखों में आंसू लिए स्वजन एंबुलेंस के पीछे खड़े रहे और ग्रामीण कीचड़ से जूझते रहे।
ग्रामीणों ने खुद बनाई राह, वर्षा ने फिर निगल ली
गांव तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों ने कई बार श्रमदान कर अस्थायी रास्ता तैयार किया है। मिट्टी और पत्थर डालकर आवागमन लायक बनाई गई यह राह वर्षा की तेज धार के सामने ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाती। हर वर्ष वही कहानी दोहराती है ग्रामीण रास्ता बनाते हैं और वर्षा उसे फिर बहा ले जाती है।
अंतिम यात्रा में भी रास्ते का दर्द झेल रहे लोग
ग्रामीणों का कहना है कि देवनद नदी पर पुल और गांव तक पक्की सड़क का निर्माण उनकी वर्षों पुरानी मांग है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब किसी घर में मौत का मातम हो, तब भी स्वजन को शव गांव तक पहुंचाने के लिए कीचड़ से जूझना पड़े तो विकास का अर्थ क्या रह जाता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि केकराही की इस समस्या को प्राथमिकता देकर देवनद नदी पर पुल और पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि किसी परिवार को अपने प्रियजन की अंतिम यात्रा में ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।
समस्या के बारे में जानकारी मिली है। समस्याओं से निजात के लिए त्वरित पहल की जाएगी।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

