सोमवार को पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट के बाद पुलिस-प्रशासन रेस्क्यू आपरेशन शुरू करवाया। खेत, मेड़, सड़क, रेलवे पटरी, बाग समेत अन्य स्थानों पर जमा भीड़ के बीच कुछ लोग राहत और बचाव कार्य में हाथ भी बंटा रहे थे। पुलिस हैंडलाउडर से भीड़ को हटने के लिए अपील करती तो जेसीबी की आवाज के बीच चीख-पुकार दब जाती।
मनौरी के पास संचालित अवैध पटाखा फैक्ट्री के पास नई कालोनी आबाद थी। यहां ज्यादातर लोग बाहर से आकर व्यापार या नौकरी के लिए परिवार संग रहते थे। विस्फोट की जद में जो घर आए वह खेतों के बीच ही थे। वहां पहुंचने के लिए तीन तरफ से रास्ता तो था, लेकिन बेहद संकरा। सोमवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे अवैध पटाखा फैक्ट्री में धमाके की गूंज करीब दूर-दूर तक तक सुनाई दी।
गोहमलवा के गुड्डू सरोज का कहना है कि वह गांव के कई लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। यहां जिस रास्ते से वह घटनास्थल तक पहुंचे, वह खेत से होकर जाता था। पानी भरे खेत में पांच बच्चे तड़प रहे थे। वह साथियों के साथ सभी को लेकर सड़क की तरफ पहुंचे, तभी दो की मौत हो गई। तीन बच्चों को पुलिसवाले इलाज के लिए ले गए।
मनौरी के मोहम्मद ने बताया कि धुएं का गुबार आसमान को छू रहा था। वह घटनास्थल की तरफ भागे, लेकिन यहां पहुंचते ही अजीब सी बदबू व आंखों में जलन का एहसास होने लगा था। चारों तरफ लोगों की भीड़ लगी थी। पटाखों की बारूद व कागज 50 मीटर से ज्यादा दूरी तक फैले थे। बीच-बीच में पटाखे फट रहे थे।
सपा नेता अशोक यादव ने बताया कि बस्ती के समीप बाग में धमाके के कारण टिनशेड, कपड़े पेड़ की डाल पर आकर लटक गए थे। किसी की हिम्मत घटनास्थल तक जाने की नहीं पड़ रही थी। पुलिस ने यलो टेप लगाकर 50 मीटर दायरे को घेर रखा था। मददगार खुद भी संभावित खतरे से परेशान दिखे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

