सुप्रीम कोर्ट ने शादी के झूठे वादे पर यौन संबंध बनाने की याचिका को बताया बेतुका, किया खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के उस प्रविधान को लागू करने की मांग की गई थी, जो शादी के झूठे वादे के आधार पर यौन संबंध बनाने से संबंधित है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने वकील एन सुदर्शनाराव की ओर से दाखिल याचिका को खारिज करने से पहले उसे पूरी तरह अपमानजनक, बेतुका और अवमानना करने वाला करार दिया।
पीठ ने सुदर्शनाराव से यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह की अपमानजनक याचिका दाखिल करने से पहले सावधानी बरतें।
जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट के दो जजों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की मांग भी की गई थी।
इस याचिका में बीएनएस, 2023 की धारा 69 को लागू करने, शादी के झूठे वादे के आधार पर शोषण का सामना करने वाली महिलाओं को कानूनी मान्यता व वित्तीय सुरक्षा देने और शीर्ष अदालत के एक हालिया फैसले में की गईं कुछ टिप्पणियों को हटाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।
बीएनएस की धारा 69 के तहत धोखे या शादी का झूठा वादा करके बनाए गए यौन संबंध को अपराध माना गया है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

