चीनी के बाद अब प्याज ने बिगाड़ा रसोई का बजट, दस दिन में 10 से 15 रुपये तक बढ़े दाम, जान लें आपूर्ति‍ का भी हाल

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 प्याज की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर आमजन की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। दस दिन पहले थोक मंडी में 25 से 30 रुपये किलो बिकने वाला प्याज अब 40 रुपये किलो पहुंच गया है। फुटकर बाजार में यही प्याज 50 रुपये किलो बिक रहा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के सब्जी मंडी के फुटकर व आढ़तियों के अनुसार महाराष्ट्र की मंडियों में भाव बढ़ने का असर स्थानीय बाजार पर पड़ा है। हालांकि फिलहाल प्याज की कमी नहीं है।

सब्जी मंडी में वाराणसी की पहाड़िया मंडी से प्रमुख रूप से प्याज की आवक होती है। नासिक के सोलापुर मंडी के अलावा मध्य प्रदेश के रीवा, सतना व इंदौर से भी प्याज आता है। जिले में प्रतिदिन करीब 50 टन यानी लगभग 1000 बोरी प्याज की खपत होती है। अकेले पीडीडीयू नगर में करीब 12.5 टन यानी 250 बोरी प्याज रोजाना खप जाती है।

सरकारी सप्लाई शुरू होने पर गिरेंगे भाव
दिल्ली व महाराष्ट्र के बड़े शहरों में प्याज का फुटकर भाव 70 रुपये किलो तक पहुंच चुका है। इसका असर दूसरे राज्यों के बाजार पर भी पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश में सरकार की ओर से प्याज की सप्लाई जल्द शुरू होने की संभावना है। सरकारी प्याज बाजार में पहुंचते ही कीमतों में गिरावट शुरू होने की उम्मीद है। कारोबारियों के अनुसार करीब एक माह तक प्याज का बाजार इसी स्तर के आसपास रह सकता है।

लहसुन के भाव स्थिर
प्याज के विपरीत लहसुन के भाव में फिलहाल कोई खास तेजी नहीं है। बाजार में लहसुन करीब 150 रुपये किलो बिक रहा है। कारोबारियों का कहना है कि अगले एक माह तक प्याज व लहसुन के बाजार में इसी तरह की स्थिति रहने की उम्मीद है।

प्याज बेचने में काफी समस्या आती है। तीन से पांच रुपये किलो कमाने में भी मुश्किल होती है। बोरी में प्याज सड़ गया तो पूरा मुनाफा खत्म हो जाता है। इसलिए अधिक मात्रा में माल रखना जोखिम भरा है। – कुंज लाल, फुटकर व्यापारी, सब्जी मंडी

प्याज का स्टॉक नहीं रखा जाता। रोज की खपत के अनुसार प्याज मंगाई जाती है। बिक्री के बाद दोबारा माल मंगाया जाता है। फिलहाल प्याज की कोई कमी नहीं है। जमाखोरी करने वालों से बचने की जरूरत है। नगर में वाराणसी स्थित पहाड़िया मंडी से नियमित आवक हो रही है।
– सिंटू सोनकर, आढ़तिया, सब्जी मंडी

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