NCL निगाही खदान में करोड़ों की सावेल मशीन पानी में डूबी! अब लीपापोती शुरू..!

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सिंगरौली। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) की निगाही परियोजना में मूसलाधार बारिश के बाद एक बड़ी सावेल मशीन के पानी में डूब जाने का मामला सामने आया है। सामने आई तस्वीरों में सावेल मशीन का अधिकांश हिस्सा पानी में डूबा दिखाई दे रहा है और केवल उसका बूम नजर आ रहा है। घटना के बाद परियोजना में मानसून पूर्व तैयारियों, खदान क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था और भारी मशीनरी की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।बताया जा रहा है कि यह मशीन B-4 सावेल है और इसकी कीमत करोड़ों रुपये की बताई जा रही है। हालांकि मशीन को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन अभी संबंधित तकनीकी एवं सक्षम अधिकारियों द्वारा किया जाना बाकी है।

क्या मानसून के पूर्व की तैयारी में गंभीर नहीं थे अधिकारी?

खुली खदानों में बारिश और जलभराव को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। DGMS की आधिकारिक सामग्री में खदानों में पानी से उत्पन्न खतरे, इनंडेशन से बचाव, जल निकासी तथा आपातकालीन तैयारी को सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। इसके अलावा DGMS के तकनीकी परिपत्रों में भी खदानों में जलभराव के खतरे से बचाव के लिए सावधानियों पर विशेष जोर दिया गया है। DGMS के सुरक्षा संबंधी दस्तावेजों में मानसून से पहले खदानों में निरीक्षण, वर्षाजल की दिशा बदलने के उपाय, ड्रेनेज सिस्टम की प्रभावशीलता तथा जल निकासी मार्गों की निगरानी जैसे उपायों पर जोर दिया गया है। ऐसे में निगाही परियोजना में यदि सावेल मशीन वास्तव में जलभराव वाले क्षेत्र में फंसकर डूबी है तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि क्या मानसून पूर्व मशीनों की सुरक्षित पार्किंग और जल निकासी व्यवस्था का पर्याप्त आकलन किया गया था?

यदि मशीन ब्रेकडाउन थी तो उसे सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं हटाया गया?

परियोजना से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह चर्चा है कि मशीन के ब्रेकडाउन होने की बात कही जा रही है। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि मशीन बारिश से पहले से ही ब्रेकडाउन थी, तो दूसरा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मूसलाधार बारिश की संभावना के बावजूद मशीन को सुरक्षित एवं ऊंचे स्थान पर क्यों नहीं हटाया गया? इस मामले में ये भी सवाल खड़े हो रहे हैं –

  • क्या मशीन की लोकेशन का मानसून पूर्व जोखिम आकलन किया गया था?
  • क्या वहां जलभराव की संभावना चिन्हित की गई थी?
  • क्या पंपिंग एवं डी-वाटरिंग की पर्याप्त व्यवस्था मौजूद थी?
  • क्या परियोजना की मानसून तैयारी योजना के अनुसार मशीनरी को सुरक्षित स्थान पर रखने के निर्देश जारी हुए थे?

नियमों में Safety Management Plan की जिम्मेदारी

वर्तमान खनन सुरक्षा ढांचे में Safety Management Plan और Hazard Management Plan की भूमिका महत्वपूर्ण है। DGMS द्वारा उपलब्ध 2026 के नियामकीय दस्तावेज में खदान के identified hazards के लिए Hazard Management Plans तथा संभावित जोखिम वाली गतिविधियों के लिए SOP तैयार करने और Safety Management Plan को लागू करने की जिम्मेदारी owner, agent और manager पर निर्धारित की गई है। इस लिहाज से निगाही परियोजना में हुई इस घटना की जांच केवल मशीन के डूबने तक सीमित न रहकर यह भी देखे जाने की जरूरत है कि मानसून पूर्व जोखिम मूल्यांकन, जल निकासी, मशीन पार्किंग, डी-वाटरिंग, आपातकालीन तैयारी और संबंधित SOP का पालन वास्तव में हुआ था या नहीं।

सोर्स: सोशल मीडिया

परियोजना प्रबंधन की कार्यशैली:

घटना के बाद निगाही परियोजना के महाप्रबंधक, परियोजना अधिकारी और खान प्रबंधक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि किसी अधिकारी की व्यक्तिगत लापरवाही अथवा जिम्मेदारी जांच के बिना तय नहीं की जा सकती। स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि मानसून को देखते हुए पहले से पर्याप्त तैयारी की गई थी तो इतनी बड़ी मशीन पानी में डूबने की स्थिति आखिर कैसे बनी? वहीं, परियोजना से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि मशीन पहले से खराब थी। यदि ऐसा है तो उसके ब्रेकडाउन की तारीख, मेंटेनेंस रिकॉर्ड, मशीन की लोकेशन, शिफ्टिंग के प्रयास और बारिश से पहले किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक जांच में महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकते हैं।

NCL Vigilance से भी सवाल

घटना के बाद NCL के Vigilance विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। मांग की जा रही है कि मामले की विभागीय स्तर पर स्वतंत्र जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि मशीन किस स्थिति में थी, उसे कहां और क्यों खड़ा किया गया था तथा बारिश से पहले उसके सुरक्षित स्थानांतरण अथवा जल निकासी के लिए क्या कदम उठाए गए थे। जांच में मशीन के मेंटेनेंस लॉग, ब्रेकडाउन रिपोर्ट, लॉगबुक, शिफ्ट रिपोर्ट, मानसून तैयारी रिकॉर्ड, पंपिंग व्यवस्था, जल निकासी योजना, मशीन की GPS/लोकेशन हिस्ट्री और घटनास्थल का निरीक्षण शामिल किया जाना चाहिए।

करोड़ों की मशीन डूबी, अब जवाबदेही तय होगी या लीपापोती?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि करोड़ों रुपये की मशीन को समय रहते सुरक्षित नहीं किया गया और जलभराव के कारण वह डूब गई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? और यदि मशीन वास्तव में पहले से ब्रेकडाउन थी, तो उसके सुरक्षित स्थानांतरण के लिए बारिश से पहले क्या प्रयास किए गए थे?

अब निगाहें NCL प्रबंधन, Vigilance और संबंधित खनन सुरक्षा अधिकारियों की जांच पर टिकी हैं। निष्पक्ष जांच ही यह स्पष्ट कर सकती है कि यह महज प्राकृतिक जलभराव की घटना थी या मानसून पूर्व तैयारी और प्रबंधन में किसी स्तर पर चूक हुई।

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