एक छोटी-सी लापरवाही ने 18 वर्षीय युवती और उसके पिता को तीन वर्षों से मानसिक पीड़ा और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के लिए मजबूर कर रखा है। जन्मतिथि में संशोधन के लिए किए आवेदन के दौरान आधार आपरेटर की गलती से युवती के जेंडर में महिला के स्थान पर किन्नर दर्ज हो गया।
युवती के लिए यह सिर्फ एक सरकारी रिकार्ड की गलती नहीं है, बल्कि उसकी पहचान से जुड़ी बात है। उसे मानसिक रूप से परेशान होना पड़ रहा है। स्वजन ने बताया कि गुरुवार को वह सीएमओ कार्यालय गए थे और उन्होंने समस्या के समाधान की गुहार लगाई थी। सीएमओ डा. पीके सक्सेना ने कहा कि यह आधार कार्ड बनाने के दौरान की त्रुटि है, इसलिए विभाग कुछ नहीं कर सकता है। यदि कोई जांच कराने के लिए कहता है, तो वह करा दी जाएगी।
पढ़ाई पर भी मंडरा रहा संकट
युवती ने वर्ष 2024 में यूपी बोर्ड से हाईस्कूल और वर्ष 2026 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की है। इसके बाद वह बीकाम में प्रवेश लेना चाहती है, लेकिन आधार में जेंडर की गलत प्रविष्टि के कारण प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी आ रही है। परिवार को आशंका है कि दस्तावेजों में विसंगति के कारण उसकी उच्च शिक्षा प्रभावित हो सकती है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

