रक्षाबंधन व आने वाले त्योहार पर मिठाइयों की मांग बढ़ते ही जिले में मिलावट का कारोबार भी जोर पकड़ने लगा है। शहर की खोवा मंडी में राजस्थान से सौ-सौ पीस के कंटेनर में रसगुल्ले और राजभोग पहुंच रहे हैं।
लागत और मेहनत बचाने के साथ मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए पिस्ते की जगह हरे रंग में रंगी मूंगफली, असली केसर की जगह सिंथेटिक और चांदी वर्क की जगह नकली वर्क का इस्तेमाल हो रहा है।
बढ़ती खपत के बीच मिलावट का खेल
त्योहार पर मिठाइयों की बढ़ती खपत के बीच मिलावट का यह खेल लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन गया है। शहर की कुछ चुनिंदा दुकानों को छोड़ दें तो अधिकांश मिठाई विक्रेता खोवा मंडी से खोवा लेकर इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, कई दुकानों पर दूध पाउडर से छेना तैयार किए जाने की जानकारी है।
कारोबारियों के अनुसार शुद्ध दूध से तैयार छेना दो-तीन दिन तक इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि पाउडर वाले दूध या सिंथेटिक दूध से तैयार छेना 24 घंटे में ही खट्टा होने लगता है। इसके बावजूद कम लागत में अधिक मिठाई तैयार करने के लिए ऐसे विकल्प अपनाए जा रहे हैं।
मिलावट रोकने के लिए हर वर्ष त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग अभियान चलाता है। शहर के खोवा मंडी में टीम की छापेमारी की सूचना मिलते ही कई दुकानदार दुकान बंद कर फरार हो जाते हैं। कार्रवाई के बाद एक-दो दिन बाजार में दहशत रहती है, फिर मामला शांत पड़ने के साथ कारोबार दोबारा पुराने ढर्रे पर लौटने लगता है।
त्योहार पर बढ़ जाता है मिलावटी मिठाइयों का उत्पादन
रक्षाबंधन के बाद जन्माष्टमी समेत कई त्योहार हैं। मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ खोवा, छेना और तैयार मिठाइयों की खपत भी बढ़ेगी। त्योहारों में खपत बढ़ने के कारण कई असामाजिक तत्व नकली खोया, कृत्रिम रंग और एसेंस का प्रयोग कर मिठाई तैयार कर रहे हैं। ऐसी मिठाइयां लिवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

