नारनौल में 750 किसानों को मिलेगा बागवानी का व्यावहारिक प्रशिक्षण, खेत बनेंगे प्रयोगशाला

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 अब किसानों को बागवानी की आधुनिक तकनीक समझाने के लिए सिर्फ कक्षाओं और बैठकों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि तकनीक को मौके पर करके दिखाया जाएगा। एकीकृत बागवानी विकास केंद्र, सुंदरह में वीलेज आफ एक्सीलेंस के तहत 15 फ्रंट लाइन डेमोस्ट्रेशन (एफएलडी) कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें कुल 750 किसान सीधे तौर पर शामिल होंगे।

प्रत्येक प्रदर्शन में 50 किसानों को शामिल किया जाएगा। इन प्रदर्शनों का खास पहलू यह रहेगा कि किसानों को केवल यह नहीं बताया जाएगा कि नई तकनीक क्या है, बल्कि उसे अपनाने की पूरी प्रक्रिया और उसके व्यावहारिक परिणाम मौके पर समझाए जाएंगे। विभाग का प्रयास किसानों को परंपरागत तरीके से आधुनिक और वैज्ञानिक बागवानी की ओर ले जाना है।

बीज से बाजार तक की समझ देने पर जोर

एफएलडी के दौरान किसानों को बागवानी उत्पादन के अलग-अलग चरणों की जानकारी दी जाएगी। बेहतर किस्म के पौध या रोपण सामग्री के चयन से लेकर पौधों की स्थापना, पोषण, सिंचाई, कीट एवं रोग प्रबंधन और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन तक की तकनीक समझाई जाएगी।

किसानों को यह भी बताया जाएगा कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए उत्पादन लागत को किस तरह नियंत्रित किया जा सकता है। विशेषज्ञ मौके पर किसानों की जिज्ञासाओं और समस्याओं का समाधान भी करेंगे। इससे किसानों को अपने खेतों में सामने आने वाली समस्याओं के लिए वैज्ञानिक उपाय समझने का अवसर मिलेगा।

15 प्रदर्शनों में 750 किसानों तक पहुंचेगा प्रयोग

सुंदरह में होने वाले 15 एफएलडी महज अलग-अलग प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं होंगे, बल्कि इनके माध्यम से 750 किसानों तक आधुनिक बागवानी तकनीक का प्रत्यक्ष अनुभव पहुंचाने की योजना है। प्रत्येक कार्यक्रम में 50 किसान शामिल होंगे। किसानों को प्रदर्शन स्थल पर तकनीकों को नजदीक से देखने और विभागीय विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने का अवसर मिलेगा।

‘देखो, समझो और खेत में अपनाओ’ रहेगा फोकस

कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत प्रदर्शन आधारित प्रशिक्षण होगी। किसान किसी तकनीक को केवल सुनकर नहीं, बल्कि उसे अपनी आंखों के सामने देखकर समझेंगे। यही वजह है कि एफएलडी को किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम माना जाता है।

विलेज ऑफ एक्सीलेंस के तहत होने वाली इस पहल से महेंद्रगढ़ में आधुनिक बागवानी को बढ़ावा देने और किसानों को पारंपरिक तरीकों के साथ नई वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने की दिशा में काम होगा। यदि किसान इन तकनीकों को अपने खेतों में अपनाते हैं तो उत्पादन की गुणवत्ता सुधारने, लागत घटाने और बागवानी को अधिक लाभकारी बनाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

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