चीख उठे बच्चे-महिलाएं: कामिका एकादशी पर बांकेबिहारी मंदिर पर भारी भीड़ से बिगड़े हालात, दो घंटे बाद मिले दर्शन

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 ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में रविवार को पड़ी कामिका एकादशी के कारण भक्तों की भारी भीड़ दर्शन के लिए पहुंच गई। उमसभरी गर्मी और भीड़ के दबाव में सुबह से ही हालात बिगड़ने शुरू हुए तो सुधरने का नाम नहीं ले रहे थे। विद्यापीठ से लेकर मंदिर तक पहुंचने में श्रद्धालुओं को लगभग दो घंटे का समय लगा। ऐसे में सिर पर तेज धूप, उमस और पसीने से तरबतर श्रद्धालुओं की भीड़ के दबाव और आपाधापी में हालात बिगड़ने लगी।

बेसुध होने लगे श्रद्धालुओं को दुकानदारों ने पानी पिलाकर राहत दी। जबकि भीड़ के बीच फंसी महिलाओं, बच्चों की हालत खराब हो रही थी।

बच्चे भीड़ से बाहर निकलने को चीख रहे थे। लेकिन, बाहर निकलने का कोई रस्ता उन्हें दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसे में कुछ लोगों ने छोटे बच्चों को कंधों पर बिठाकर राहत दी।

दिल्ली-एनसीआर से बड़ी संख्या में पहुंचे भक्त

ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में रविवार को कामिका एकादशी पड़ने के कारण दिल्ली एनसीआर और आसपास के जनपद व प्रांतों से श्रद्धालु ठाकुर बांकेबिहारीजी के दर्शन करने को पहुंच गए। सुबह छह बजे से ही मंदिर के आसपास भक्तों की भीड़ का दबाव बनने लगा और हालात संभालने के लिए पुलिस ने बैरियर लगा दिए। मंदिर के पट खुलते ही भीड़ का रेला मंदिर के अंदर पहुंचा। लेकिन, रेलिंग में जगह फुल होने के बाद श्रद्धालुओं का प्रवेश रोक दिया गया।C

तेज धूप और पसीने से तरबतर हुए श्रद्धालु

लगातार श्रद्धालुओं को रोक-रोककर आगे बढ़ाया जाने लगा। लेकिन, उमसभरी गर्मी में सिर पर तेज धूप और पसीने से तरबतर श्रद्धालुओं को भीड़ के दबाव ने बेसुध कर दिया। हालात ये कि लोग भीड़ के दबाव में फंसे थे न तो वे बाहर ही निकल पा रहे थे और न ही आगे बढ़ पा रहे थे। पुलिस बैरियर पर जैसे ही उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति मिलती, दौड़कर आगे पहले पहुंचने की होड़ में श्रद्धालु एक दूसरे को धकिया रहे थे। ऐसे हालातों में महिलाएं, बच्चे पिछड़ जाते।

कंधों पर बैठाकर बच्चों को कराए दर्शन

बच्चे इन हालातों को देखकर चीखने लगे तो स्वजनों ने उन्हें कंधे पर बिठाकर आगे तक ले जाने में सहायता की। एक बैरियर खुला तो आगे दूसरे बैरियर पर फिर से इन्हीं हालातों से श्रद्धालुओं को जूझना पड़ा। धीरे-धीरे लगभग दो घंटे में श्रद्धालु विद्यापीठ से मंदिर तक पहुंच रहे थे। सुबह से शुरू हुआ भीड़ का दबाव शाम तक बना रहा।

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