Mata Vaishno Devi: बैटरी कार-हेलीकॉप्टर बंद, बारिश में भीगते हुए भी मां के जयकारे लगाते भवन की ओर बढ़ रहे श्रद्धालु

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खराब मौसम और रुक-रुककर हो रही बारिश के बावजूद शनिवार को मां वैष्णो देवी की यात्रा पारंपरिक मार्ग से निरंतर जारी रही। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को बारिश के साथ ठंडी हवाओं का भी सामना करना पड़ा। मौसम खराब होने पर श्रद्धालु यात्रा मार्ग पर बनाए गए आश्रय स्थलों में कुछ समय विश्राम करने के बाद फिर भवन की ओर रवाना होते रहे।

शुक्रवार रात से रुक-रुककर हो रही बारिश शनिवार को भी दिनभर जारी रही। मौसम को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा के दृष्टिगत बैटरी कार मार्ग को शुक्रवार रात करीब 12 बजे बंद कर दिया गया था। शनिवार तड़के करीब पांच बजे मौसम में कुछ सुधार होने पर मार्ग को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। इससे श्रद्धालुओं को कुछ राहत मिली, लेकिन बारिश दोबारा शुरू होने के बाद सुरक्षा के मद्देनजर श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड प्रशासन ने शनिवार सुबह करीब 10 बजे बैटरी कार मार्ग को फिर बंद कर दिया।

बैटरी कार मार्ग बंद रहने के बावजूद श्रद्धालुओं की यात्रा पारंपरिक मार्ग से सुचारु रूप से जारी रही। वहीं, खराब मौसम के चलते हेलीकॉप्टर सेवा के साथ बैटरी कार सेवा भी स्थगित रही। हालांकि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को घोड़ा-पिट्ठू और पालकी आदि की सेवाएं उपलब्ध रहीं।

यात्रा मार्ग पर तैनात हैं सुरक्षा और आपदा प्रबंधन दल

बारिश के बीच श्रद्धालु मां वैष्णो देवी के दिव्य दर्शन के लिए उत्साह के साथ भवन की ओर बढ़ते रहे। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए आपदा प्रबंधन दल, सीआरपीएफ, श्राइन बोर्ड प्रशासन और पुलिस विभाग के अधिकारी व जवान विभिन्न स्थानों पर तैनात रहे। सुरक्षा कर्मियों द्वारा लगातार यात्रा मार्ग की निगरानी की जा रही है और श्रद्धालुओं को मौसम को देखते हुए जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने तथा पूरी सतर्कता के साथ यात्रा करने की सलाह दी जा रही है।

खराब मौसम के बावजूद दिनभर श्रद्धालु पंजीकरण करवाकर परिवार और मित्रों के साथ भवन की ओर रवाना होते रहे। प्रशासन तथा श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की ओर से यात्रा व्यवस्था और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित एवं सुखद बनी रहे।

शनिवार दोपहर करीब दो बजे तक लगभग 12 हजार श्रद्धालु पंजीकरण करवाकर भवन की ओर रवाना हो चुके थे। इसके बाद भी श्रद्धालुओं का कटड़ा पहुंचने और यात्रा के लिए पंजीकरण करवाने का सिलसिला जारी रहा।

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