TGT संस्कृत भर्ती पर हाई कोर्ट का निर्देश, 3 महीने में सार्वजनिक करनी होगी संशोधित आंसर की और विशेषज्ञ रिपोर्ट

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पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा में टीजीटी संस्कृत (आरओएच एवं मेवात कैडर) भर्ती परीक्षा की संशोधित उत्तर कुंजी और विषय विशेषज्ञों की रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की मांग पर हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) को तीन महीने के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने कहा कि आयोग याचिका को ही विस्तृत प्रतिनिधित्व मानकर अभ्यर्थियों को सुनवाई का अवसर दे, संशोधित उत्तर कुंजी और विशेषज्ञों की रिपोर्ट का खुलासा करते हुए तय समय में निर्णय ले। यदि अभ्यर्थी राहत के पात्र पाए जाते हैं तो उन्हें तत्काल लाभ दिया जाए।

हाई कोर्ट ने नरेश कुमार एवं अन्य की याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किया।याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि 21 फरवरी 2023 को जारी विज्ञापन टीजीटी संस्कृत (आरओएच एवं मेवात कैडर) पदों के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी।

इसके बाद पुनर्मूल्यांकन किया गया, लेकिन जिस संशोधित उत्तर कुंजी के आधार पर यह प्रक्रिया हुई, उसे अभ्यर्थियों के सामने सार्वजनिक नहीं किया गया। इतना ही नहीं, विभिन्न प्रश्नों पर दर्ज आपत्तियों के संबंध में स्वतंत्र विषय विशेषज्ञों द्वारा दी गई राय और उसके औचित्य से जुड़ी रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की गई।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की समन्वय पीठ द्वारा सविता रानी बनाम हरियाणा राज्य मामले में 27 अक्टूबर 2025 को दिए गए निर्णय के विपरीत है। उस फैसले में उत्तर कुंजी और विशेषज्ञों की राय से जुड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया था।

उन्होंने यह भी दलील दी कि आयोग की कार्रवाई तेजपाल एवं अन्य बनाम हरियाणा राज्य मामले में हाई कोर्ट द्वारा निर्धारित सिद्धांतों का भी उल्लंघन करती है।सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि यदि अदालत इस याचिका को ही विस्तृत प्रतिनिधित्व मानते हुए संबंधित प्राधिकारी को उस पर समयबद्ध तरीके से स्पीकिंग ऑर्डर पारित करने का निर्देश दे दे, तो वे उसी से संतुष्ट होंगे।

हरियाणा सरकार की ओर से पेश राज्य के वकील ने भी इस सीमित प्रार्थना पर कोई आपत्ति नहीं जताई और कहा कि संबंधित प्राधिकारी को इस संबंध में समयबद्ध निर्णय लेने का निर्देश दिया जा सकता है।दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वह इस याचिका को ही विस्तृत प्रतिनिधित्व मानकर याचिकाकर्ताओं के मामले पर विचार करे।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का अवसर देने के बाद संशोधित उत्तर कुंजी और विषय विशेषज्ञों की रिपोर्ट का खुलासा करते हुए प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से तीन महीने के भीतर विस्तृत एवं कारणयुक्त आदेश पारित किया जाए।

हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि लिए गए निर्णय की जानकारी याचिकाकर्ताओं को दी जाए और यदि वे मांगी गई राहत के पात्र पाए जाते हैं तो संबंधित प्राधिकारी उन्हें तत्काल राहत प्रदान करे। इसी निर्देश के साथ अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया।

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