सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म (रेप) से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान अपनाई जाने वाली भाषा और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक कार्यवाही के दौरान ‘लज्जा भंग’, ‘बेबस महिला’ और इसी तरह के रूढ़िवादी या पूर्वाग्रहपूर्ण शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों की सुनवाई संवेदनशीलता, गरिमा और पीड़िता के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए की जानी चाहिए। न्यायिक अधिकारियों और संबंधित पक्षों को ऐसी भाषा से बचने का निर्देश दिया गया है, जो किसी भी रूप में पीड़िता के प्रति पूर्वाग्रह, सामाजिक रूढ़ियों या असम्मानजनक दृष्टिकोण को बढ़ावा देती हो।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली शब्दावली निष्पक्ष, सम्मानजनक और संवेदनशील होनी चाहिए। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक कार्यवाही पीड़ित-केंद्रित (Victim-Centric) दृष्टिकोण के अनुरूप हो और सभी संबंधित पक्ष गरिमापूर्ण व्यवहार बनाए रखें।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

