नौसेना की और बढ़ेगी ताकत, 11 जुलाई को बेड़े में शामिल होगा स्टेल्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’
भारतीय नौसेना के बेड़े में एक और नया समरवीर शामिल होने जा रहा है। स्वदेशी तकनीक से निर्मित अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’ 11 जुलाई को आधिकारिक रूप से भारतीय नौसेना में कमीशन होने के लिए पूरी तरह तैयार है।
पूर्वी घाट की पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया यह युद्धपोत भारत के अदम्य साहस, लचीलेपन और अटूट संकल्प का जीवंत प्रतीक है। पूर्वी घाट ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु से होकर गुजरने वाली 1,750 किलोमीटर तक फैली हुई एक पर्वत श्रृंखला है।
आत्मनिर्भर भारत की बुलंद तस्वीर
‘महेंद्रगिरि’ प्रोजेक्ट 17ए (शिवालिक-क्लास) का छठा युद्धपोत है, जिसे नौसेना के ‘वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो’ ने डिजाइन किया है और मुंबई के मझगांव डाक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा निर्मित किया गया है। यह युद्धपोत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की एक शानदार मिसाल है, क्योंकि इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसके निर्माण से देश के एमएसएमई और रक्षा औद्योगिक आधार को नई मजबूती मिली है।
समुद्र का नया ‘अभेद्य कवच’
यह फ्रिगेट सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं और एकीकृत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है। आधुनिक ‘कंबाइंड डीजल या गैस’ प्रणोदन प्रणाली से संचालित यह पोत न केवल उच्च गति से चलने में सक्षम है, बल्कि इसकी रडार से बचने की क्षमता (स्टेल्थ फीचर्स) इसे समंदर का एक अदृश्य शिकारी बनाती है।
यह बहुआयामी युद्धपोत हवाई, सतही और पनडुब्बी रोधी अभियानों के साथ-साथ आपदा राहत और खोज अभियानों में भी सक्षम है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में ‘महेंद्रगिरि’ एक अचूक ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ साबित होगा, जो नौसेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

